चन्द्रपाल सिंह सेंगर
फर्रुखाबाद (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले की आलू मंडी सातनपुर में सोमवार को आलू के भाव 200रुपये प्रति कुंतल उछाल मार गए। साढ़े 300 रुपये प्रति पैकेट बिकने वाला आलू आज साढे 400 रुपये प्रति पैकेट बिका। एक पैकेट में 50 किलो आलू की भर्ती होती है। आलू के भाव उतरने चढ़ने से किसानों को चिंता सताने लगी है कि अब वह अपने बेटे बेटियों के हाथ पीले कैसे कर पाएंगे।
बताते चलें कि, फर्रुखाबाद जिले में प्रमुख पैदावार आलू की है। यहां का किसान आलू की खेती के ऊपर ही निर्भर है। गत वर्ष आलू के दाम अच्छे मिलने से किसानों के दिन बहुर आए थे। लेकिन अगेती फसल का आलू तैयार होने के बाद आलू के भाव दिन प्रतिदिन नीचे ऊपर हो रहे हैं। आज यहां 900 रुपये प्रति कुंतल आलू बिका। मंडी समिति में आज आलू की आमद 100 मोटर रही। आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष रिंकू वर्मा ने बताया कि आज भी आलू की लिवाली कम रही। लेकिन भाव 200 रुपये प्रति कुंतल उछल गए।
फर्रुखाबाद जिले में इस वर्ष 42000 हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती की गई है। जिसमें 2000 हेक्टेयर भूमि पर अगेती फसल तैयार की गई है। जिसमें 1000 हेक्टेयर भूमि पर आलू की खुदाई हो चुकी है। जिसे किसान ओने पौने में बेच चुका है। मौजूदा समय में 41000 हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल खड़ी हुई है। आलू के भाव नीचे ऊपर होने से आलू किसानों की नींद उड़ी हुई है।
सर्वाधिक आलू पैदा करने वाले प्रगतिशील किसान नारद सिंह कश्यप का कहना है कि कल तक आलू के भाव 700 रुपये प्रति कुंतल रहे जिसमें किसानों की गांठ से लागत का पैसा जा रहा था। आज आलू 200 रुपये प्रति कुंतल उछाल मार जाने से किसान न मुनाफा न घाटे की स्थिति में आ गया है। फिलहाल चार हजार रुपया प्रति क्विंटल बिकने वाला आलू इस समय 900 रुपया प्रति कुंतल बिक रहा है।
प्रगतिशील किसान नारद सिंह कश्यप का कहना है कि किसानों ने 4000 रुपया प्रति कुंतल आलू खरीद कर अपने खेतों में फसल तैयार की है और फसल तैयार होने के बाद आलू के भाव फिर झटका मारने लगे हैं। जिससे अन्नदाता पूरी तरह से आहत हो गया है। अपने बेटे बेटियों की शादी किसान आलू की फसल तैयार होने के बाद ही कर पाता है। लेकिन जब किसान को आलू की फसल में कोई फायदा नहीं होगा तो वह आखिर अपने बेटे-बेटियों की शादी कैसे करेंगे। यह सवाल उनके जेहन में कोंध ने लगा है।
आलू विभाग के निरीक्षक रामनाथ राजपूत का कहना है आलू की एक साथ तैयार होने की वजह से आलू के भाव नीचे गिर रहे हैं। जरूरी नहीं कि मार्च में खोदे जाने वाले आलू के दाम यही बने रहे। उनका कहना है कि भाव, मौत, वर्षा के संबंध में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। किसानों को समय समय पर अपना आलू खोद कर बेंचते रहना चाहिए।
