Tuesday, March 31, 2026
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UP News : अपर मुख्य सचिव कृषि ने भारतीय सब्जी अनुसंधान परिसर में किया भ्रमण

-उत्तर प्रदेश को सब्जी बीज उत्पादन के लिए हब बनाने पर जोर

वाराणसी (हि.स.)। प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (कृषि) डॉ.देवेश चतुर्वेदी ने सोमवार को जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा के साथ रोहनिया शहंशाहपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान परिसर का दौरा किया। परिसर में भ्रमण के दौरान अपर मुख्य सचिव ने संस्थान से विकसित सब्जी की किस्मों के बारे में जानकारी लेने के बाद इसे किसानों के बीच समय से पहुंचाने की बात कही। संस्थान के निदेशक डॉ. जगदीश सिंह ने परिसर में शोध परियोजनाओं की उपलब्धियों को बताया। सचिव ने संस्थान के वैज्ञानिकों से सब्जियों पर चल रहे विशिष्ट अनुसंधान कार्यक्रमों पर चर्चा की और उपलब्धियों पर संतोष जताया।
संस्थान के सभागार में बैठक के दौरान निदेशक डॉ. जगदीश सिंह ने प्रोजेक्टर के माध्यम से सब्जी अनुसंधान के क्षेत्र में किये गये रिसर्च और उसके विपणन सहित भविष्य में आर्गेनिक सब्जी उत्पादन आदि की जानकारी दी। संस्थान के निदेशक ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 2756 कृषकों को ट्रेनिंग दी गई है तथा पिछले पांच सालों में सब्जियों की 41 किस्मे विकसित की गई हैं। निजी कम्पनियों के साथ 43 एमओयू किये जा चुके हैं। 
बैठक में डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि किस प्रकार किसानों की आय को बढ़ाने में यह संस्थान अहम भूमिका निभा सकता है। आर्गेनिक सब्जी एवं फल की मांग बढ़ने वाली है। इसे ध्यान में रख कर इसका प्लान तैयार करने का निर्देश सचिव ने उप निदेशक कृषि स्मिता वर्मा को दिया। इसके अलावा आर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने और इसके सर्टिफिकेशन के लिए कृषि विभाग के जिला निदेशक को निर्देश दिए। 
उन्होंने कहा कि अधिक उपज देने वाली फसलों व सब्जियों की प्रजाति विकसित करने के पश्चात् उसके उत्पादन की जानकारी किसानों को दी जाय, जिससे वे अच्छी आमदनी कर सकें। यह संस्थान बीज उत्पादन करने में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और सीड हब बन सकता है। आर.के.वी.वाई योजना के अंतर्गत किसानों को सब्सिडाइज्ड सीड के पैकेट वितरित किये जायें जिससे वह किसानों में लोकप्रिय हो और ज्यादा से ज्यादा पैदावार हासिल की जा सके। 
उन्होंने कहा कि  परिवर्तित जलवायु की परिस्थितियों में इस संस्थान के पास अनेकों तकनीकें जैसे – ताप, बाढ़ एवं सूखा रोधी किस्में, पौधों का कलम बंधन, पॉली हाउस में उत्पादन, बेमौसम में होने वाली सब्जियों की खेती आदि किसानों के लिए बहुत महत्व रखती हैं। अच्छा होगा कि नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत प्रकृतिक—जैविक खेती कि प्रक्रिया को समाहित किया जाना चाहिए। इसके लिए सम सामयिक तकनीकी प्रशिक्षण किसानों एवं अधिकारियों को दी जानी चाहिए तथा प्रशिक्षण उपरांत उनके उपयोग के आकड़ें भी रखे जाने चाहिए। 
उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष जैविक खेती किसान करते रहें इसके लिए कार्बनिक विधि से उगाई गई बीज कि प्रचुर मात्रा उन्हें मिलनी चाहिए। देश में तेलंगाना प्रांत के तर्ज पर पूर्वी उत्तर प्रदेश को सब्जी बीज उत्पादन के लिए हब बनाया जाना चाहिए। जिससे उत्तर प्रदेश एवं बिहार के किसानों को गुणवत्ता युक्त बीज मिल जाए। 
बैठक के पूर्व सचिव ने संस्थान के पास स्थित 300 की क्षमता वाली गोशाला में रखे गये 280 आवारा पशुओं की जानकारी ली और उनकी देखभाल के बारे में पूछा। गोशाला के निकट निर्माणाधीन बायोगैस प्लांट का निरीक्षण किया। निरीक्षण में बायो गैस तैयार करने के लिए गाय के गोबर की आपूर्ति, बायो गैस तैयार करने और सप्लाई आदि के बारे में पूछताछ की। इस दौरान डॉ. नीरज सिंह, डॉ. पी.एम. सिंह सहित संस्थान के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

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