प्रयागराज (हि.स.)। इलाहाबाद-झांसी खण्ड स्नातक का मतदान एक दिसम्बर को है। जिसके लिए प्रत्याशियों ने सघन जनसम्पर्क अभियान और तेज कर दिया है। इस दौरान अटेवा का मुद्दा सभी प्रत्याशियों पर भारी पड़ता दिखायी दे रहा है।
एक ओर जहां अटेवा प्रत्याशी शिक्षकों व कर्मचारियों के हित में पुरानी पेंशन बहाली के लिए संघर्षरत हैं और जब तक पेंशन बहाली नहीं होगी तब तक उन्होंने पेंशन भत्ता न लेने का शपथ पत्र दिया है। इससे शिक्षकों एवं कर्मचारियों में कुछ आस जगी है। अटेवा प्रत्याशी डॉ. हरि प्रकाश यादव का कहना है कि या तो पेंशन बहाली हो या सांसद व विधायकों को मिलने वाला पेंशन बंद किया जाय। इस मुद्दे पर उनका प्रचार-प्रसार जोर पकड़ रहा है और उनके समर्थन में कई संगठन जी-जान से जुटे हैं।
वहीं सपा प्रत्याशी डॉ. मानसिंह यादव भी पेंशन बहाली की बात करने लगे है। जबकि एक अप्रैल 2005 को उप्र में जब पुरानी पेंशन बंद हुई थी, तब मुलायम सिंह की सरकार थी। दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी डॉ. यज्ञदत्त शर्मा जो पांचवी बार मैदान में हैं इनके सदन में रहते ही पेंशन बंद हुई। उन्होंने भी इसके लिए कुछ नहीं किया। भाजपा इस चुनाव में भी शिक्षकों व कर्मचारियों के हित की बात छोड़ मोदी और योगी सरकार के विकास का राग अलाप रही है।
इस बारे में मानव शोध संस्थान के निदेशक राजीव मिश्रा का कहना है कि यह चुनाव सत्ता बनाम मुद्दे का है। चुनाव में जीत मिलती है तो मुद्दा जीतेगा और हार मिलती है तो मुद्दा हारेगा। पेंशनर्स एसोसिएशन यूपी के अध्यक्ष डॉ.आरएस वर्मा का कहना है कि पेंशन बुढ़ापे की लकड़ी होती है और यही सहारा है। सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए। प्रयागराज की किन्नर महामंडलेश्वर टीना मॉ का कहना है कि डॉ. हरि प्रकाश यादव का मुद्दा बहुत अच्छा है और मेरा पूरा आशीर्वाद उनके साथ है। पूर्व आबकारी आयुक्त कृष्ण चंद्रा का कहना है कि अन्य पार्टियां पुराने घिसे-पिटे मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ रही हैं, जिसमें कोई दम नहीं दिखाई दे रहा है। अब इसका परिणाम तो तीन दिसम्बर को ही पता चलेगा।
