-अरविंद केजरीवाल द्वारा यूपी में विस चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी-राजनीतिक समीक्षकों का है कहना, ग्रामीण स्तर पर बिना आधार बनाये, नहीं संभव है यूूपी में कोई करिश्मा
लखनऊ (हि.स.)। आम आदमी पार्टी ने अब यूपी में भी विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इसके चुनाव लड़ने का असर भले ही ज्यादा न पड़े लेकिन मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गयी है। कोई इसे मुंगेरीलाल के हसीन सपने तो कोई जुमला कह रहा है। इसका असर यूपी के राजनीति पर कितना पड़ेगा, इसका पता तो विधान चुनाव के बाद ही चलेगा लेकिन वर्तमान राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो पंचायत चुनाव के बाद ही आम आदमी पार्टी के सपने चकनाचूर हो जाएंगे।
आम आदमी पार्टी द्वारा चुनाव विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कोई अचानक नहीं है। इसकी शुरूआत कोरोना काल से पहले ही आप के प्रवक्ता संजय सिंह को यूपी का प्रभारी नियुक्त कर पार्टी ने संकेत दे दिये थे। कोरोना काल से पहले ही संजय सिंह ने लखनऊ में एक सम्मेलन भी किया था। कोरोना काल में समय-समय पर संजय सिंह ने सरकार के खिलाफ हमला बोलकर अखबारों की सुर्खियों में भी बने रहे।
वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक समीक्षक हर्ष वर्धन त्रिपाठी का कहना है कि सुर्खियों में रहने का तरीका तो आम आदमी पार्टी जानती है। जब नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ट्रेन से वाराणसी में पर्चा दाखिला करने गये और चुनाव लड़े तब भी उन्होंने सुर्खियां बटोरी। उस समय तक अभी दिल्ली में इन्होंने हाल ही में सरकार बनायी थी। इस कारण लोग ज्यादा आकर्षित भी थे, लेकिन क्या हर्ष हुआ। यह सबके सामने है। उन्होंने कहा कि जमीनी कार्यकर्ता तलाश रही आम आदमी पार्टी के सपने पंचायत चुनाव में ही चकनाचूर हो सकते हैं।
राजनीतिक समीक्षक राजीव रंजन सिंह का कहना है कि अभी प्रदेश में ब्लाक स्तर पर भी जिस पार्टी के सक्रिय पदाधिकारियों का गठन न हो पाया हो। वह पार्टी सबसे बड़े प्रदेश में धमाकेदार उपस्थिति कैसे दिखा सकती है। उन्होंने कहा कि इतना जरूर है कि आम आदमी पार्टी हमेशा सुर्खियों में रहना जानती है। इससे बहुत लोग प्रभावित भी होते हैं लेकिन उन प्रभावित लोगों वोट में तब्दील कर देना, बहुत बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव के बहाने आम आदमी पार्टी पंचायत स्तर पर जमीनी आधार तलाशने का प्रयास करेगी लेकिन इतनी जल्दी ग्रामीण स्तर पर आधार मिलना कठिन काम होगा। यह दिल्ली नहीं है।
लखीमपुर-खिरी के वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह राणा का कहना है कि दिल्ली में सिर्फ कांग्रेस और भाजपा से लड़ाई थी। यहां तो बसपा, सपा, भाजपा से आम आदमी पार्टी को दो-चार होना पड़ेगा। इस कारण उसके लिए यहां करिश्मा करना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस समय अन्ना जैसा कोई व्यक्तित्व भी आम आदमी पार्टी के सामने नहीं है, जो आंधी की तरह माहौल पैदा कर दे। दिल्ली में चुनाव जीतना तो अन्ना आंदोलन की देन थी।
Up विधानसभा चुनाव से पूर्व यूपी के पंचायत चुनाव में ही “आप” के सपने हो सकते हैं चकनाचूर
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