विधानसभा से पहले सेमीफाइनल के रुप में देखा जा रहा है पंचायत चुनाव
कानपुर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में होने जा रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तारीखों का भले ही एलान न हुआ हो, पर सभी को मालूम है कि अब पंचायत चुनाव मई माह के पहले हर हालत में हो जाएंगे। इसको लेकर सत्ताधारी पार्टी भाजपा ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर तक अपनी चुनावी समितियों का गठन तेज कर दिया है। भाजपा की सक्रियता को देख विपक्ष भी चुनावी कमर कसने जा रहा है। सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी पंचायत चुनावों को लेकर जिस तरह से संजीदा है उससे यही माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस चुनाव को दोनों ओर से सेमीफाइनल के रुप में देखा जा रहा है।
पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अपनी तैयारियां कर रही भारतीय जनता पार्टी तीन अलग-अलग समितियां बनाकर चुनाव मैदान में उतरेगी। इसमें जिले से लेकर पंचायत स्तर तक के पदाधिकारियों को लगाया जाएगा। पंचायत चुनाव को लेकर भाजपा ने सबसे पहले अपनी सक्रियता शुरु कर दी है। अब उसकी सक्रियता नजर भी आने लगी है। पंचायत से लेकर विकास खंड तक बैठकें होने लगी हैं। चुनाव के लिए जिला संचालन समिति के अलावा विकास खंड संचालन समिति, जिला पंचायत वार्ड संचालन समिति रहेंगी। हर स्तर की समिति में अलग-अलग स्तर के पदाधिकारी को शामिल किया गया है। इसकी रचना इस तरह की जा रही है ताकि जिस स्तर पर जाकर चुनाव लड़ा जा रहा है, वहां उसकी पूरी सुविधा मिल सके। इसमें जिला संचालन समिति जहां चुनाव के प्रबंधन में रहेगी वहीं जिला पंचायत वार्ड संचालन समिति के स्तर पर चुनाव मैदान में संघर्ष किया जाएगा। भाजपा की इस रणनीति पर विपक्ष पूरी तरह से नजर रखे हुए है और विपक्ष की कोशिश है कि पंचायत चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए माहौल तैयार किया जाये। वहीं सत्ताधारी पार्टी जीत को बरकरार रख जनता के बीच यह संदेश देना चाहती है कि विपक्ष की जनता के बीच पकड़ पहले की भांति कमजोर बनी हुई है।
