बकरी के बच्चे को कुत्ते से बचाने में हुई थी हो गई थी मौत
प्रादेशिक डेस्क
प्रतापगढ़। जिले के फतनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में आयोजित एक जांबाज मुर्गे की तेरहवीं में भारी भीड़ जुटी। मुर्गे के स्वामी पेशे से चिकित्सक ने उसके अंतिम संस्कार से लेकर सभी संस्कार भी किए। जानकारी के अनुसार, थाना क्षेत्र के बेहदौल कला गांव निवासी डॉ. सालिक राम सरोज अपना क्लीनिक चलाते हैं। घर पर उन्होंने बकरी व एक मुर्गा पाल रखा था। मुर्गे से पूरा परिवार इतना प्यार करने लगा कि उसका नाम लाली रख दिया। बीते सात जुलाई को एक कुत्ते ने डॉक्टर साहब की बकरी के बच्चे पर हमला बोल दिया। यह देख लाली उस कुत्ते से भिड़ गया। उसने बकरी के बच्चे को तो बचा लिया, लेकिन कुत्ते के हमले में वह भी गंभीर रूप से घायल हो गया था। परिणाम स्वरूप उसने भी दम तोड़ दिया। डाक्टर ने घर के पास ही उसका शव दफना दिया। यहां तक तो सब सामान्य था लेकिन जब उन्होंने रीति रिवाज के मुताबिक मुर्गे की तेरहवीं की घोषणा की तो लोग चौंक उठे। इसके बाद अंतिम संस्कार के कर्मकांड होने लगे। सिर मुंडाने से लेकर अन्य कर्मकांड पूरे विधि विधान से किए गए। आज सुबह से ही हलवाई तेरहवीं का भोजन तैयार करने में जुट गए। आसपास के करीब 600 लोग तेरहवीं में आमंत्रित किए गए थे। लोगों ने आकर बाकायदा खाना खाया।
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