नेशनल डेस्क
नई दिल्ली। फीमेल स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने यूनिवर्सिटी कॉलेज में पढ़ रहीं महिला छात्राओं के लिए बड़ी राहत की खबर दी है। उनके द्वारा किये गए एलान से कॉलेज-यूनिवर्सिटी की विवाहित छात्राएं ख़ुशी से झूम उठी हैं। यूजीसी ने एलान किया हैं कि अब फीमेल स्टूडेंट्स को भी मातृत्व अवकाश यानी मैटरनिटी लीव का लाभ मिलेगा। इसके लिए यूजीसी ने अपने 2016 रेगुलेशन में एक नया प्रावधान जोड़ा है। यूजीसी ने खुद इस संबंध में जानकारी दी है। इसके लिए आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट पर नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस के अनुसार, यूजीसी द्वारा मातृत्व अवकाश को लेकर जो बदलाव किये गये हैं, उसका लाभ उन स्टूडेंट्स को मिलेगा जो एमफिल या पीएचडी कोर्स में नामांकित होंगी। नोटिस में कहा गया है कि ‘एमफिल और पीएचडी के पूरे कोर्स के दौरान किसी महिला स्टूडेंट को एक बार मैटरनिटी लीव/चाइल्ड केयर लीव (बच्चे की देखभाल के लिए अवकाश) दी जा सकती है। यह अधिकतम 240 दिन यानी 8 महीने की छुट्टी हो सकती है।’ इसके अलावा यूजी पीजी स्टूडेंट्स को भी फायदे दिये जाएंगे। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन ने बताया है कि इसके लिए यूजीसी रेगुलेशन 2016 में बदलाव कर एक नया प्रावधान जोड़ा गया है। नियमावली में यह प्रावधान जोड़ने के बाद यूजीसी ने सभी संबद्ध कॉलेजों, विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों को एक पत्र भेजा है। इसमें संस्थानों से अपील की है कि वे स्टूडेंट्स को मातृत्व अवकाश देने के संबंध में आवश्यक नियम तैयार करें।
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सिर्फ मैटरनिटी लीव ही नहीं, स्टूडेंट्स को और भी कई फायदे मिलेंगे। जहां एमफिल व पीएचडी स्टूडेंट्स को पूरी मैटरनिटी लीव मिलेगी, वहीं यूजी व पीजी की पढ़ाई कर रही वीमेन स्टूडेंट्स कोअटेंडेंस में छूट, परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तारीख में छूट समेत अन्य आवश्यक सुविधाएं दी जाएंगी। इसके लिए संस्थानों को तैयारी पूरी करनी होगी और नियम निर्धारित करने होंगे। यूजीसी का यह पत्र सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भेजा जा चुका है। आप यूजीसी की वेबसाइट पर जाकर इस संबंध में जारी नोटिस पढ़ सकते हैं। बता दें यूजीसी नियमन 2016 के तहत अब तक एमफिल और च्ीक् की छात्राओं को ही 240 दिन तक मैटरनिटी लीव मिलती है। यूजीसी के सचिव प्रो. रजनीश जैन की ओर से मंगलवार को सभी विश्वविद्यालयों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि एमफिल और पीएचडी की छात्राओं की तरह ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की छात्राओं को भी मैटरनिटी लीव दें। इसके लिए संस्थान अपने स्तर पर नियम लागू कर सकते हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय कितने दिन की लीव देंगे, यह उनका अपना फैसला होगा। इससे पहले मैटरनिटी लीव नहीं मिलने के कारण छात्राएं एमफिल और शोध में आगे नहीं आती थीं। एमफिल-पीएचडी कर रही छात्राओं की शादी होने के बाद शहर बदलने पर वो बीच में ही इस कोर्स को छोड़ देती थीं। इस परेशानी को देखते हुए पूर्व शिक्षामंत्री स्मृति ईरानी ने नियम बदलकर ऐसा कर दिया कि आधा कोर्स पूरा होने के बाद यदि शहर बदले तो अन्य विश्वविद्यालय में छात्राओं को नए सिरे से दाखिला नहीं लेना होगा, वही कोर्स जारी रहेगा।

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