Sunday, February 8, 2026
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Social Media Alert: गैरजिम्मेदार पोस्ट से बचें, वरना जाना पड़ सकता है जेल

छोटी-सी गलती और बड़ा नुकसान, जानिए Social Media की कौन-सी हरकतें दिला सकती हैं सज़ा

नालेज डेस्क

Social Media Alert को लेकर आज के समय में सतर्क रहना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आम लोग अपने विचार, फोटो और वीडियो साझा करते हैं, जो कभी-कभी गंभीर कानूनी संकट का कारण बन सकते हैं। इंटरनेट की दुनिया में बढ़ती पहुंच और लोगों की डिजिटल एक्टिविटी के चलते सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि एक जिम्मेदारी भी बन चुका है।

भारत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), साइबर क्राइम कानून और आपराधिक दंड संहिता (IPC) की कई धाराएं सोशल मीडिया के गलत उपयोग पर सख्त सजा का प्रावधान करती हैं। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि हम Social Media Alert को गंभीरता से लें और उन गतिविधियों से दूर रहें जो जेल का कारण बन सकती हैं।

धार्मिक या जातीय घृणा फैलाने वाली पोस्ट
Social Media Alert का सबसे पहला और अहम पहलू है कि किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ कोई भी पोस्ट, वीडियो या फोटो साझा न करें। सोशल मीडिया पर यदि आप किसी समुदाय विशेष के खिलाफ घृणा फैलाने वाली भाषा का प्रयोग करते हैं, तो यह भारतीय कानून के अनुसार दंडनीय अपराध है।

आईटी एक्ट की धारा 66A, 153A और IPC की धारा 295A जैसे कानूनों के तहत आपके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो सकती है और जेल तक जाना पड़ सकता है। ऐसे में सोशल मीडिया पर अपने शब्दों और पोस्ट्स के चयन में अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए।

अफवाह फैलाने और झूठी खबर शेयर करने से भी सज़ा संभव
Social Media Alert में यह भी साफ चेतावनी दी जाती है कि सोशल मीडिया पर झूठी खबरें साझा करने से बड़ा नुकसान हो सकता है। गलत जानकारी या अफवाह फैलाना, जिससे सार्वजनिक शांति भंग हो, न केवल अनैतिक है, बल्कि अपराध की श्रेणी में आता है।

अगर आपकी किसी पोस्ट से दंगे, जन आक्रोश या गलतफहमियां फैलती हैं, तो पुलिस और साइबर सेल की नज़र आप पर तुरंत पड़ सकती है। IT एक्ट की धारा 66F और IPC की धारा 505 के तहत जेल तक हो सकती है।

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Social Media Alert: गैरजिम्मेदार पोस्ट से बचें, वरना जाना पड़ सकता है जेल

महिलाओं के प्रति अभद्रता और साइबर उत्पीड़न
Social Media Alert का एक अन्य अहम बिंदु महिलाओं से जुड़े अपराध हैं। यदि आप सोशल मीडिया पर किसी महिला को गलत संदेश भेजते हैं, उसकी बिना इजाजत के फोटो पोस्ट करते हैं या उस पर अभद्र टिप्पणी करते हैं, तो यह साइबर उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।

आईपीसी की धारा 354D, 509 और आईटी एक्ट की धारा 66E के तहत आपको जेल हो सकती है। इसलिए सोशल मीडिया पर बातचीत के दौरान शिष्टता बनाए रखें और किसी भी तरह की अपमानजनक हरकत से बचें।

कॉपीराइट कंटेंट का अवैध उपयोग भी अपराध
Social Media Alert यह भी बताता है कि यदि आप किसी और के कंटेंट जैसे फोटो, वीडियो या लेख को बिना अनुमति के अपने अकाउंट पर पोस्ट करते हैं, तो यह कॉपीराइट उल्लंघन माना जाएगा।

कॉपीराइट एक्ट 1957 के तहत यह कानूनन अपराध है और जुर्माने के साथ-साथ जेल की सज़ा भी हो सकती है। अतः हमेशा यह सुनिश्चित करें कि जो कंटेंट आप शेयर कर रहे हैं, वह आपका खुद का हो या आपने उसका उचित लाइसेंस प्राप्त किया हो।

Social Media Alert केवल एक चेतावनी नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी का प्रतीक है। डिजिटल युग में हमारी एक पोस्ट या कमेंट भी गंभीर कानूनी परिणाम ला सकती है। इसलिए किसी भी पोस्ट को शेयर करने से पहले 2 बार सोचें। सोशल मीडिया को सकारात्मकता और जागरूकता का माध्यम बनाएं, न कि अपराध का रास्ता।

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