Wednesday, January 14, 2026
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संभल विवादः हाईकोर्ट का चौंकाने वाला फैसला, लगाई मुहर

जामा मस्जिद सर्वे पर रोक लगाने से किया इनकार, कहा-अब तक की कार्रवाई वैध

संभल विवाद में हिंदू पक्ष ने बताया अपनी जीत, बांटी गई मिठाई, मस्जिद कमेटी की याचिका खारिज

प्रादेशिक डेस्क

प्रयागराज/संभल। संभल विवाद ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरीं, जब सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जामा मस्जिद के सर्वे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। मस्जिद की इंतजामिया कमेटी की सिविल रिवीजन याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने कहा कि संभल विवाद में अब तक की सभी कार्रवाइयां वैध हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सर्वे और मुकदमा संभल की दीवानी अदालत में जारी रहेगा। इस फैसले ने हिंदू पक्ष को उत्साहित किया, जबकि मस्जिद कमेटी अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है।

संभल विवाद की शुरुआतः हरिहर मंदिर का दावा
संभल विवाद की जड़ में हिंदू पक्ष का दावा है कि जामा मस्जिद का निर्माण 1529 में मुगल शासक बाबर ने हरिहर मंदिर को तोड़कर किया था। यह याचिका कैलादेवी मंदिर के महंत ऋषि राज गिरि ने 19 नवंबर 2024 को संभल कोर्ट में दायर की थी। उसी दिन सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह ने एडवोकेट कमिश्नर रमेश सिंह राघव को सर्वे का आदेश दिया। शाम 4 बजे सर्वे शुरू हुआ, जो रात होने के कारण अधूरा रह गया। 24 नवंबर को दोबारा सर्वे के लिए टीम पहुंची।

इस दौरान भारी भीड़ जमा हो गई। भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने संभल विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।

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हिंसा के बाद सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की भूमिका
संभल विवाद में हिंसा के बाद मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कमेटी ने सर्वे पर रोक की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट को सौंपा और संभल कोर्ट को आगे की कार्रवाई से रोक दिया। 8 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में सर्वे पर रोक लगाई और सभी पक्षों से जवाब मांगा। 13 मई को बहस पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। सोमवार को आए फैसले में कोर्ट ने कहा कि संभल विवाद में सर्वे का आदेश सही था। कोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका को सुनने योग्य माना और सर्वे जारी रखने की अनुमति दी।

हिंदू पक्ष की खुशी, मस्जिद कमेटी की नाराजगी
संभल विवाद में हाईकोर्ट के फैसले ने हिंदू पक्ष को उत्साह से भर दिया। संभल में हिंदू पक्ष के लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई बांटी और इसे अपनी जीत बताया। उनका कहना है कि सर्वे से साबित होगा कि जामा मस्जिद की जगह पहले हरिहर मंदिर था। वे अब पूजा के अधिकार के लिए कोर्ट में दावा करेंगे। वहीं, मस्जिद कमेटी ने फैसले पर निराशा जताई। कमेटी के वकील ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। साथ ही, हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने पर भी विचार चल रहा है। कमेटी का तर्क है कि सर्वे से सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है।

संभल विवाद में हिंदू पक्ष की जीत का जश्न
संभल विवाद में हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने मिठाई बांटकर जीत का जश्न मनाया।

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संभल विवाद का कानूनी और सामाजिक प्रभाव
संभल विवाद ने धार्मिक और सामाजिक तनाव को बढ़ा दिया है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष हैं। वे 1879 की एएसआई रिपोर्ट का हवाला देते हैं, जिसमें मंदिर के निशान होने की बात कही गई है। दूसरी ओर, मस्जिद कमेटी 1991 के पूजा स्थल अधिनियम का उल्लेख करती है, जो 1947 की स्थिति को बनाए रखने की बात कहता है। हिंसा के बाद संभल में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं। स्कूल और बाजार भी बंद रहे। पुलिस ने 3000 से अधिक लोगों के खिलाफ सात एफआईआर दर्ज कीं। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की तैयारियों पर भी सवाल उठाए।

आगे क्या होगा?
संभल विवाद में अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर हैं। मस्जिद कमेटी जल्द ही अपील दायर कर सकती है। अगर सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है, तो संभल कोर्ट में सर्वे और मुकदमा तेजी से आगे बढ़ेगा। हिंदू पक्ष की कोशिश होगी कि सर्वे जल्द पूरा हो और मंदिर के दावे को मजबूती मिले। वहीं, मस्जिद कमेटी सर्वे को पूरी तरह रुकवाने की कोशिश करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला लंबा चल सकता है, क्योंकि यह धार्मिक और कानूनी रूप से संवेदनशील है। संभल विवाद का असर उत्तर प्रदेश की सांप्रदायिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।

संभल विवाद : हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
संभल विवाद : हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

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प्रशासन की चुनौतीः शांति बनाए रखना
संभल विवाद के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती शांति बनाए रखना है। 24 नवंबर की हिंसा के बाद पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी थी। ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की गई। प्रशासन ने अफवाहों पर रोक के लिए सोशल मीडिया पर नजर रखी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद संभल में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त की जा सकती है। स्थानीय सांसद जियाउर रहमान बर्क ने सर्वे को सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा बताया था। उन्होंने कहा कि बाहरी लोग इस विवाद को भड़का रहे हैं। दूसरी ओर, हिंदू पक्ष का कहना है कि यह उनका धार्मिक अधिकार है।

संभल विवाद का भविष्य
संभल विवाद अब केवल स्थानीय मसला नहीं रहा। यह मामला ज्ञानवापी और मथुरा जैसे विवादों की कतार में शामिल हो गया है। हाईकोर्ट का फैसला हिंदू पक्ष के लिए बड़ी जीत है, लेकिन मस्जिद कमेटी के लिए यह झटका है। इस मामले का अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट में ही संभव है। फिलहाल, संभल में तनाव कम करने की जरूरत है। प्रशासन और दोनों पक्षों को संयम बरतना होगा। संभल विवाद का नतीजा न केवल धार्मिक स्थलों के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि देश की सामाजिक एकता पर भी असर डालेगा।

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