08 मार्च 2024 को की गई थी पत्रकार Raghvendra Bajpai की हत्या
प्रयागराज में भी STF ने ढेर किया चार लाख का इनामिया गैंगस्टर आशीष रंजन उर्फ छोटू धनबादिया
जानकी शरण द्विवेदी
लखनऊ। सीतापुर के पत्रकार Raghvendra Bajpai की बहुचर्चित हत्या में शामिल एक-एक लाख के इनामी दो शूटरों को गुरुवार सुबह STF और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल के मुताबिक, दोनों बदमाशों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था और वे कई महीनों से फरार चल रहे थे। मुठभेड़ के बाद पूरे जिले में सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
SP के अनुसार, Raghvendra Bajpai हत्याकांड में शामिल इन शूटरों की गतिविधियों की गुप्त सूचना STF को मिली थी। इसके बाद पिसावां क्षेत्र में STF, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने चेकिंग अभियान शुरू किया गया। सुबह बाइक पर आते दो संदिग्ध युवकों को रोकने का प्रयास किया गया। इस दौरान दोनों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाशों को गोली लगी। पुलिस ने तत्काल उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मारे गए अपराधियों की पहचान संजय तिवारी उर्फ अकील खान और राजू तिवारी उर्फ रिजवान के रूप में हुई है। दोनों सगे भाई थे और इनका आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस के अनुसार, इन्होंने ही 8 मार्च 2024 को पत्रकार Raghvendra Bajpai की हत्या की थी। यह हत्या उस वक्त सुर्खियों में आ गई थी जब हाईवे पर बाइक से जा रहे राघवेंद्र को ओवरब्रिज पर रोका गया और ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गईं। इस निर्मम हत्या से राज्यभर के पत्रकार संगठनों और नागरिकों में आक्रोश फैल गया था।
Raghvendra Bajpai महोली कस्बे के निवासी थे और एक राष्ट्रीय हिंदी अखबार के लिए रिपोर्टिंग करते थे। हत्या वाले दिन वे बाइक से कहीं जा रहे थे, तभी ओवरब्रिज पर हेमपुर रेलवे क्रासिंग के पास उन्हें घेरकर तीन गोलियां मारी गईं। उनके कंधे और सीने में गोली लगने से मौके पर ही हालत गंभीर हो गई थी। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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इस हत्याकांड की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि Raghvendra Bajpai की हत्या मंदिर के पुजारी शिवानंद बाबा उर्फ विकास राठौर की साजिश थी। बाबा ने पत्रकार को मंदिर परिसर में आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। उसे लगा कि यह बात बाहर आ सकती है, जिससे उसकी छवि खराब हो जाएगी। इसी डर से उसने Raghvendra Bajpai को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
बाबा ने अपने दो परिचितों असलम गाजी और निर्मल सिंह के जरिए शूटरों को चार लाख रुपये की सुपारी दी। पुलिस की गिरफ्त में आए बाबा ने खुलासा किया कि Raghvendra Bajpai ने उस पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया और पैसों की मांग की थी। बाबा ने कुछ पैसे देकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की, लेकिन जब पत्रकार नहीं माना, तो हत्या की साजिश रच डाली।
अब तक पुलिस ने इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता पुजारी शिवानंद बाबा, असलम गाजी और निर्मल सिंह कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गुरुवार को हुई मुठभेड़ में Raghvendra Bajpai की हत्या में शामिल दोनों मुख्य शूटरों के मारे जाने से पुलिस ने इस केस की सबसे अहम और अंतिम कड़ी भी खत्म कर दी। पुलिस अधीक्षक का कहना है कि Raghvendra Bajpai हत्याकांड की जांच अब अंतिम चरण में है। अभियुक्तों से बरामद हथियारों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।
इस तरह की घटनाएं पत्रकारों की स्वतंत्रता पर सीधा हमला हैं और प्रशासन ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई को प्रतिबद्ध है। इस एनकाउंटर के बाद पत्रकार संगठनों और आम नागरिकों ने राहत की सांस ली है। पत्रकार संघ ने प्रशासन से मांग की है कि Raghvendra Bajpai जैसे पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए ठोस नीति बने और जिम्मेदारों को जल्द सजा दिलाई जाए।
प्रयागराज में भी STF ने ढेर किया चार लाख का इनामिया
Raghvendra Bajpai हत्याकांड के शूटरों को मारे जाने से पूर्व प्रयागराज में बुधवार रात यूपी एसटीएफ और झारखंड के 4 लाख के इनामिया कुख्यात गैंगस्टर छोटू धनबादिया उर्फ आशीष रंजन के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें गैंगस्टर ढेर हो गया। यह मुठभेड़ शंकरगढ़ इलाके के शिवराज चौराहे पर हुई। एसटीएफ को सूचना मिली थी कि छोटू प्रयागराज में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है। सूचना के आधार पर एसटीएफ ने क्षेत्र में घेराबंदी की और छोटू को रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने AK-47 और 9MM पिस्टल से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में छोटू को गोली लगी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
एसटीएफ को मुठभेड़ स्थल से एक AK-47 राइफल, पिस्टल और भारी मात्रा में 9MM कारतूस बरामद हुए हैं। छोटू धनबादिया झारखंड का एक बड़ा अपराधी था, जो उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में सक्रिय था। उसके खिलाफ कई राज्यों में गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज थे, जिनमें नीरज तिवारी और लाला खान हत्याकांड प्रमुख हैं। यूपी एसटीएफ को उसकी लंबे समय से तलाश थी। उसकी प्रयागराज में मौजूदगी की खबर मिलते ही सुरक्षा एजेंसियों ने उसे घेरने की रणनीति बनाई और अंततः उसे मुठभेड़ में मार गिराया गया।
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