सोनाक्षी का कड़वा सचः बताया थिएटर से मिडिल क्लास दर्शकों की दूरी का कारण!
इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म निकिता रॉय के प्रमोशन में जुटी हैं सोनाक्षी सिन्हा
मनोरंजन डेस्क
मुंबई। निकिता रॉय फिल्म से सोनाक्षी सिन्हा एक बार फिर दर्शकों के बीच लौटने को तैयार हैं, लेकिन इस बार खबर सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि उनका दिया गया बेबाक बयान भी है जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। सोनाक्षी ने सिनेमाघरों में मिडिल क्लास दर्शकों की घटती उपस्थिति को लेकर जो कहा, वह भारतीय सिनेमा के बाजार मॉडल पर बड़ा सवाल है। इस सबके बीच उनकी फिल्म निकिता रॉय 27 जून 2025 को रिलीज हो रही है और फैंस को उससे काफी उम्मीदें हैं।
आईएएनएस को दिए गए एक इंटरव्यू में सोनाक्षी ने साफ कहा कि निकिता रॉय जैसी फिल्में तो बन रही हैं, मगर थिएटर तक पहुंचने वाले दर्शकों की संख्या घटती जा रही है। खासतौर पर मध्यम वर्ग के लोग अब सिनेमा हॉल से दूरी बना रहे हैं और इसका कारण सिर्फ टिकट नहीं, बल्कि बदलता पारिवारिक गणित है।
सोनाक्षी कहती हैं, ‘फिल्मों की कहानियों में कोई कमी नहीं है। हर तरह की फिल्में बन रही हैं, लेकिन अब जो कमी दिख रही है, वह है थिएटर तक पहुंच।’ उन्होंने कहा कि निकिता रॉय एक ऐसी फिल्म है जिसे थिएटर में देखना एक अनुभव होगा, लेकिन मिडिल क्लास परिवार के लिए आज थिएटर का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है।
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उन्होंने आगे कहा कि एक सामान्य परिवार जब फिल्म देखने जाता है तो सिर्फ टिकट ही नहीं, बल्कि पॉपकॉर्न, पार्किंग, ट्रैवलिंग कृ इन सबका मिलाकर खर्च बहुत ज्यादा हो जाता है। यही वजह है कि लोग अब ओटीटी पर फिल्में देखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि निकिता रॉय जैसी कहानी थिएटर में देखने लायक अनुभव है।
फिल्म निकिता रॉय की बात करें तो इसमें सोनाक्षी सिन्हा के साथ परेश रावल, अर्जुन रामपाल और सुहैल नायर जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। यह फिल्म इसलिए भी खास है क्योंकि इसे सोनाक्षी के भाई कुश सिन्हा ने डायरेक्ट किया है। यह उनके निर्देशन में बनी पहली फिल्म है, और वह इसे लेकर बेहद गंभीर हैं।
निकिता रॉय की शूटिंग पूरी हो चुकी है और प्रमोशन जोरों पर है। फिल्म का ट्रेलर भी दर्शकों को चौंकाने में कामयाब रहा है। हॉरर और सस्पेंस का ऐसा संगम लंबे समय बाद देखने को मिलेगा, खासकर बड़े पर्दे पर।
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इस बीच सोनाक्षी के बयान ने बॉलीवुड के कारोबारी ढांचे की असलियत को भी उजागर कर दिया है। दर्शकों से दूरी, टिकट की कीमतें, ओटीटी की बढ़ती पकड़ और सिनेमाघरों का शहरीकरण कृ ये सभी पहलू फिल्मों के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर असर डाल रहे हैं। और इस मुद्दे को निकिता रॉय के प्रमोशन के बीच उठाकर सोनाक्षी ने एक बहस को जन्म दे दिया है।
फिल्म समीक्षकों का भी मानना है कि अगर निकिता रॉय बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करती है, तो यह बड़े पैमाने पर साबित कर देगी कि कंटेंट ही असली राजा है, चाहे वह थियेटर हो या डिजिटल प्लेटफॉर्म। साथ ही यह कुश सिन्हा के निर्देशन करियर के लिए भी बड़ी शुरुआत होगी।
निकिता रॉय सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि आज के सिनेमाई दर्शक, उनकी प्राथमिकताएं, उनकी सीमाएं और उनकी उम्मीदों की एक परत खोलने का प्रयास है। सोनाक्षी का बयान इस बात की तस्दीक करता है कि फिल्म इंडस्ट्री को अब दर्शकों की बदलती सोच के साथ कदम मिलाकर चलना होगा। उनके जेब पर पड़ने वाले खर्च के बारे में भी सोंचने की जरूरत है।
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