Friday, April 3, 2026
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National News : राहुल ने किसान आंदोलन और बजट के मुद्दे पर सरकार को घेरा

नई दिल्ली (हि.स.)। किसान आंदोलन और आम बजट को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि सरकार के इस बजट से 99 फीसदी आबादी की बेहतरी की उम्मीद थी लेकिन हक़ीक़त यह है कि इसे एक फीसदी लोगों के लिए ही बनाया गया है। बजट में आम आदमी के हाथ में पैसा देने तथा छोटे व्यापारियों के बारे सोचा ही नहीं गया। वहीं किसान आंदोलन को लेकर राहुल ने कहा कि सरकार का काम किसानों को डराना, धमकाना, मारना नहीं है। सरकार को किसानों से बात करनी चाहिए और काले कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए।
राहुल गांधी ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि सरकार ने न्याय योजना जैसा काम किया होता, छोटे व्यापारियों के बारे सोचा होता, तो बेहतर होता। उनकी इस सोच से आम आदमी के हाथ में पैसे जाते, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती। सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, “उन्हें उम्मीद थी कि सरकार ऐसा बजट लाएगी जिससे 99 फीसदी आबादी को फायदा होगा, लेकिन इसे बनाया ही एक फीसदी लोगों के लिए गया है। गरीब, जरूरतमंद लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के बजाय कुछ पूंजीपतियों का ध्यान रखा गया है।”
कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन के मुद्दे पर राहुल गांधी ने केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार का काम किसानों को डराना, धमकाना, मारना नहीं है। सरकार को तत्काल किसानों से बात करनी चाहिए, कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए क्योंकि किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में किसानों ने देश को बचाया, वे हमारी रीढ़ की हड्डी हैं लेकिन सरकार उन्हें भी बर्बाद करना चाहती है। 
वहीं दिल्ली बॉर्डर पर तारबंदी आदि को लेकर राहुल ने सवाल किया कि आखिर किलाबंदी क्यों की जा रही है? क्या किसान दुश्मन हैं? जो किसान सभी को भोजन देते हैं…उन्हें क्यों धमकाया जा रहा है। उनसे मारपीट की जा रही है। सरकार उनसे बात कर समाधान क्‍यों नहीं निकालना चाहती। यह समस्या देश के लिए अच्‍छी बात नहीं है।  
चीन के साथ सीमा विवाद के मसले पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि एक ओर हमारे बहादुर सैनिक कठिन परिस्थितियों और चीन से लड़ रहे हैं। चीन भारत में प्रवेश करता है और हमारी जमीन पर कब्जा करता है। ऐसे में सरकार उन्हें क्या संदेश दे रही है कि हम अपने रक्षा व्यय में वृद्धि नहीं करेंगे। देश की रक्षा को मजबूत करने के लिए सेना का खर्च बढ़ाने के बजाय सरकार की प्राथमिकता कुछ पूंजीपतियों को प्रोत्साहित करना है। आखिर ये किस प्रकार का राष्ट्रवाद है?

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