देश में महंगाई का दौर आने वाले कुछ महीनों तक और रहने वाला है। विशेषज्ञों की राय में कोर महंगाई यानी ईंधन और खाने पीने की चीजों को छोड़कर बाकी सामान के दाम जुलाई से पहले घटने वाले नहीं हैं। इसके पीछे की वजह तमाम बढ़ती मांग और उद्योग धंधों का चालू न हो पाना है। आर्थिक विशेषज्ञ प्रणब सेन के मुताबिक, कोर क्षेत्र की महंगाई इस साल के मध्य तक घटनी शुरू होगी और सब ठीक रहा तो साल के आखिर तक ही जाकर घट पाएगी क्योंकि लंबे समय बाद एक साथ औद्योगिक गतिविधियां होनी शुरू हुई हैं और कच्चे माल की जरूरत बढ़ी है।
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि पैदावार अच्छी रहने की वजह से खाने-पीने की चीजों के दाम ज्यादा नहीं बढ़ेंगे। क्योंकि मांग के मुकाबले आपूर्ति की व्यवस्था है। साथ ही उन्होंने ये आशंका भी जाहिर की है कि अगर लॉकडाउन और कर्फ्यू को ठीक तरह से मैनेज नहीं किया गया तो खाने-पीने की चीजों की भी महंगाई भी बढ़ सकती है।
मार्च में थोक महंगाई दर आठ साल के उच्चतम स्तर पर
मार्च महीने में थोक महंगाई दर आठ साल के उच्चतम स्तर 7.39 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है। इसके पीछे अहम वजह कच्चे तेल और धातु की बढ़ती कीमतों को माना जा रहा है। पिछले साल कोविड-19 महामारी के प्रकोप को रोकने के लिए लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के चलते कीमतें कम थीं। लेकिन अब जब कारोबारी गतिविधियां शुरू हो गयी हैं तो हालात बदलने लगे हैं।
हालांकि महामारी की दूसरी लहर को लेकर भी चिंताएं हैं लेकिन क्योंकि अभी तक देशव्यापी लॉकडाउन नहीं लगाया गया है और कई राज्यों में औद्योगिक क्षेत्रों और जरूरी सामान के उत्पादन को रियायत भी दी जा रही है। ऐसे में उत्पादन बढ़ते रहने का ही अनुमान है।
