नवाचार से पुरानी सड़क निर्माण पद्धतियों को चुनौती, गड्ढे और प्रदूषण की समस्या होगी समाप्त
देश भर के लिए रोल माडल बनेगी गोंडा में MSS Plus Technology से बनी सड़क, यूपी में बन रहीं 38 सड़कें
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। भारत सरकार के वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और जेएमवीडी इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त शोध से विकसित MSS Plus Technology के जरिये उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने लगभग पांच किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया है। इस तकनीक से बनी सड़क न केवल गड्ढामुक्त होगी बल्कि प्रदूषण और कार्बन रेडिएशन की समस्या में भी कमी लाएगी।
उत्तर प्रदेश में MSS Plus Technology से बनी यह पहली सड़क है। इसके निरीक्षण के लिए मंगलवार को गोंडा पहुंचीं सीएसआईआर की सचिव और महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने बताया कि जिस प्रकार से फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक का विकास पहले उत्तर प्रदेश में हुआ और बाद में पूरे भारत में लागू किया गया, उसी तरह इस तकनीक का भी गोंडा से सफल परीक्षण कर देशभर में विस्तार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि MSS Plus Technology सड़क निर्माण के दौरान कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाती है, जो संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप हरित संरचना के निर्माण के लिए आवश्यक है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 133.77 लाख रुपये की लागत से गोंडा-नवाबगंज मार्ग से बक्सर ग्रांट-अंबरपुर संपर्क मार्ग का निर्माण इसी तकनीक से किया गया है।

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तकनीक के विकासकर्ता और वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक सतीश पांडे ने कहा कि इसका पहला प्रयोग लखनऊ में हुआ था, जहां कुदाल और फावड़ा जैसे कठोर परीक्षणों के बाद भी सड़क में गड्ढा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह तकनीक पर्यावरण और हरित क्रांति के क्षेत्र में अत्यंत लाभकारी है और निकट भविष्य में पूरे भारत में अपनाई जाएगी।
उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (यूपीआरआरडीए) के प्रमुख अभियंता बृजेश कुमार दुबे ने बताया कि भारत सरकार द्वारा इंसेंटिव मनी के रूप में आवंटित धनराशि से इस सड़क का निर्माण किया गया। उन्होंने कहा कि MSS Plus Technology से गोंडा समेत प्रदेश के छह जिलों में 201 किलोमीटर लंबी 38 सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही, आगामी परियोजनाओं में पूरे राज्य में इस तकनीक को अपनाने की योजना है। निरीक्षण के दौरान दिल्ली से आए अधिकारियों ने इस तकनीक से निर्मित सड़क की सराहना की और उम्मीद जताई कि अन्य राज्यों के लोग भी उत्तर प्रदेश आकर इस तकनीक को सीखेंगे और अपने-अपने क्षेत्रों में लागू करेंगे।
निरीक्षण के मौके पर सीआरआरआई के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं MSS Plus Technology के आविष्कारक डॉ. मनोरंजन परिदा, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान के निदेशक सतीश पांडे, सीएसआईआर-एसईआरसी के निदेशक डॉ. पी. प्रदीप कुमार, डॉ. एन. आनंदवल्ली, सीएसआईआर विज्ञान संचार और प्रसार प्रभाग के प्रमुख डॉ. जी. महेश, यूपीआरआरडीए के राज्य तकनीकी अधिकारी डीडी पाठक, गोंडा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता जेबी सिंह तथा जेएमवीडी इंडस्ट्रीज के प्रौद्योगिकी प्रदाता रविशंकर जायसवाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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