गोंडा में आयोजित हिंदू सम्मेलन में अश्विनी उपाध्याय ने मनुस्मृति को बताया प्राचीनतम संहिताबद्ध ग्रंथ
निजी स्वार्थों के लिए सत्तालोलुप कलमकारों ने मनुस्मृति की टीका करते समय जोड़े महिला व दलित विरोधी श्लोक
अतुल भारद्वाज
गोंडा। भारतीय संविधान शुद्ध रूप से हिंदू संविधान है। इसकी गलत व्याख्या की जा रही है। हमें वास्तविकता को समझने की जरूरत है। जिस दिन हम तथ्यों को भली-भांति समझ जाएंगे, हमारा सारा भ्रम दूर हो जाएगा। यह बात प्रखर राष्ट्रवादी वक्ता और सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने शनिवार की रात आरएसएस द्वारा प्रतिष्ठित एससीपीएम पैरामेडिकल कालेज में आयोजित हिंदू सम्मेलन में बोलते हुए कही।
उपाध्याय के अनुसार, आज हमें पढ़ाया जाता है कि विश्व के 10 देशों के संविधानों से प्रमुख तत्व लेकर भारतीय संविधान बनाया गया। किंतु क्या कभी इस प्रश्न पर विचार किया गया कि आखिर उन देशों ने ये तत्व कहां से प्राप्त किए? शायद नहीं। दरअसल, उन देशों के संविधानों में जो तत्व वर्णित हैं, वे विश्व के प्राचीनतम संहिताबद्ध ग्रंथ मनुस्मृति के साथ ही वेद, पुराण, उपनिषद आदि धर्मग्रंथों से लिए गए हैं। विश्व में जब शिक्षा नाम की चीज नहीं हुआ करती थी, तब मनुस्मृति में राजा और शासन, न्याय और दंड, स्त्री, परिवार और उत्तराधिकार, वर्ण और सामाजिक व्यवस्था आदि के बारे में विस्तार से लिख दिया गया था। 2500 श्लोकों वाले इस मूल ग्रंथ में मुगल और अंग्रेज शासनकाल तथा आजादी के बाद कुछ वामपंथी कलमकारों ने इस पर टीका लिखी और इसमें जान-बूझकर कुछ विवादित श्लोक शामिल कर दिये।
मनुस्मृति से स्वार्थी तत्वों ने की छेड़छाड़
उपाध्याय ने कहा कि ‘जननी जन्मभूमिश्च’, ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते’ और ‘नारी तू नारायणी’ जैसे तथ्यों के माध्यम से महिला सम्मान की बात करने वाले इस ग्रंथ को कुछ सत्तालोलुप लेखकों ने महिला और दलित विरोधी बताने का काम किया। प्राचीन काल से ही सनातन धर्म में इसी ग्रंथ के प्रकाश में बालिकाओं को न केवल शास्त्र, बल्कि शस्त्र की भी शिक्षा दी जाती थी। इतिहास साक्षी है कि आदि शंकराचार्य को शास्त्रार्थ में मंडन मिश्र की पत्नी उभय भारती ने पराजित किया। कैकेय देश पर रावण द्वारा आक्रमण किए जाने पर राजा अश्वपति की पुत्री कैकेयी ने युद्धभूमि में रथ का कुशलतापूर्वक संचालन किया। इस प्रकार बेटियों को शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा दिए जाने के अनेक उदाहरण इतिहास में दर्ज हैं।

कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था बनाती है मनुस्मृति, जाति आधारित नहीं
उन्होंने कहा कि मनुस्मृति में सामाजिक मानव जीवन के बारे में विस्तार से बहुत कुछ लिखा गया है। इसके अध्याय छह में राजा के कर्तब्य और राजधर्म तथा अध्याय आठ में न्याय, अपराध व राजनीतिक मामलों की चर्चा की गई है। मनुस्मृति के 10वें अध्याय के 65वें श्लोक में ‘कर्मणा जायते जातिः’ का स्पष्ट उल्लेख है। इसी कारण सगोत्रीय होने के बावजूद राजा दशरथ और गुरु वशिष्ठ दोनों की जाति कर्म के आधार पर निर्धारित की गई। हस्तिनापुर (वर्तमान एशिया) के महाराज शान्तनु के निधन के बाद रानी सत्यवती (नाविक पुत्री) ने राज्य सिंहासन का कुशलतापूर्वक संचालन किया। सूतपुत्र होने के बावजूद कर्ण न केवल कौरव सेना का प्रधान सेनापति बना, बल्कि दुर्योधन ने उसे अंग देश का राजा भी बनाया। इतिहास की ये घटनाएं बताती हैं कि भारत में वर्ण व्यवस्था जाति नहीं, बल्कि कर्म पर आधारित थी। उन्होंने कानून के कालेजों में मनुस्मृति को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने पर बल दिया।
हिंदू धर्मग्रंथों को छोड़ अन्यत्र कहीं नहीं है सर्वे भवंतु सुखिनः की बात
उन्होंने कहा कि विश्व की 6500 भाषाओं में लिखे गए 1100 धार्मिक ग्रंथों में से केवल हिंदू ग्रंथों में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ की बात की गई है। कुछ लोग तलवार के बल पर अपने धर्म के विस्तार तथा उसे न मानने वाले का सिर कलम करने की बात करते हैं। क्या इस विचारधारा को फैलाने वाली पुस्तक को छपने, बेंचने, पढ़ने-पढ़ाने की अनुमति मिलनी चाहिए? आज झूठे नैरेटिव को ठीक करने की जरूरत है। उस सोच को खत्म करने की जरूरत है, जो इंसान को इंसान नहीं मानती। ऊपर वाला सम विधान (संविधान) लागू करता है, जबकि नीचे वाले बहु विधान लागू करते हैं।

संविधान के अनुच्छेद 14 पर भी उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि हमारे संविधान का अनुच्छेद 14 समानता की बात करता है। उसकी नजर में गाय और शेर दोनों जानवर हैं। बबूल और आम के पेड़ दोनों वृक्ष हैं। किंतु क्या इन्हें एक साथ रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने ही उनके चरित्र भिन्न-भिन्न बनाए हैं। इसलिए उनका साथ रह पाना संभव ही नहीं है। मानव और दानव दोनों एक साथ नहीं रह सकते। मानवाधिकार मानव का होता है, दानव का नहीं। उपाध्याय ने कहा कि सनातन हमें स्वतंत्रता देता है, जबकि गैर सनातन हमें गुलाम बनाता है। सनातन हमें पहनने, घूमने, सोचने, लिखने, बोलने और न्याय की आजादी देता है, जबकि गैर सनातन धर्मों में इन सब पर पाबंदियां हैं। अपनी बात को और अधिक स्पष्ट करते हुए उन्हांने कहा कि भारत की भांति ही संविधान, सेना, सुप्रीम कोर्ट और सरकार जैसी सभी व्यवस्थाएं हमारे पड़ोसी गैर सनातन देशों में भी हैं, किंतु भारत में अल्पसंख्यकों को कोई खतरा नहीं है। उनकी आबादी लगातार बढ़ रही है, जबकि पड़ोसी देशों में सनातन धर्म के अनयायी लगभग समाप्त होने के कगार पर हैं। भारत के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से आठ हिंदू-विहीन हो चुके हैं। यदि हम नहीं चेते तो आने वाले समय में स्थिति भयावह हो सकती है।
इनकी रही विशिष्ट उपस्थिति
इस मौके पर संघ के अवध प्रांत के संपर्क प्रमुख गंगा सिंह, विभाग प्रचारक प्रवीण, जिला प्रचारक सतीश, नगर प्रचारक अमित, डॉ. ओएन पांडेय, अलका पांडेय, पंकज अग्रवाल, अश्विनी शुक्ल, रणविजय सिंह, ज्योति पांडेय, धर्मेंद्र पांडेय, तारकेश्वर शुक्ल, अजिताभ दुबे, धीरज दूबे, शिव बहादुर पांडेय, विष्णु प्रताप नारायण सिंह, गीता दूबे, मेनका दूबे, राजेशराय चंदानी, सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

बच्चों को हनुमान चालीसा पढ़ाने पर जोर
धानेपुर के के रामलीला मैदान में रविवार को हिंदू सम्मेलन आयोजित हुआ। मुख्य वक्ता राजकिशोर ने कहा कि आरएसएस की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने पांच स्वयंसेवकों के साथ की थी और आज संघ विश्व के 80 देशों में सक्रिय है। योगी ज्ञानीनाथ ने मोबाइल के कारण बच्चों के परिवार से दूर होने पर चिंता जताई। महंत अरुण दास ने बच्चों को हनुमान चालीसा व अन्य धार्मिक ग्रंथ पढ़ाने पर बल दिया। संत छोटे बाबा ने हिंदुत्व पर विचार रखे। मेहनौन विधायक विनय द्विवेदी सहित अतिथियों ने मां भारती की आरती उतारी। संचालन रामप्रकाश ने किया।

हिंदू सम्मेलन में सामाजिक एकता पर जोर
हलधरमऊ के चौरी चौराहा स्थित गौरव सिंह मेमोरियल डिग्री कॉलेज में आयोजित हिंदू सम्मेलन में आरएसएस के पूर्वी उप्र के बौद्धिक प्रमुख मिथिलेश जी ने समाज को एकजुट होकर सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और मूल्यों की रक्षा करने की आवश्यकता बताई। भाजपा विधायक बावन सिंह ने कहा कि समाज के संगठित और जागरूक रहने से ही देश की एकता और अखंडता मजबूत होगी। सम्मेलन में वैभव सिंह, बेंचूलाल, धर्मपाल सिंह, मदन सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

हिंदू सम्मेलन में राष्ट्रवाद पर जोर
नगर के आवास विकास बस्ती में आयोजित हिंदू सम्मेलन में विहिप के प्रांत संगठन मंत्री विजय प्रताप ने कहा कि 2047 तक भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने के सपनों को देश का युवा कड़ा उत्तर देगा और उनके नापाक इरादों को कुचल देगा। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराजा सुहेलदेव को आदर्श मानने वाला युवा राष्ट्रहित में सजग है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास गुलामी का नहीं, बल्कि 1200 वर्षों के संघर्षों का रहा है। आजादी चरखे से नहीं, बल्कि सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल और राजेंद्र नाथ लाहिड़ी जैसे क्रांतिकारियों के संघर्ष से मिली।
इतिहासकारों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास को तोड़-मरोड़कर पढ़ाया गया, इसलिए 2035 तक मैकाले की शिक्षा पद्धति समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। दो बच्चों अजितेष और अस्तित्व ने ओजस्वी काव्य पाठ किया। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक राकेश वर्मा गुड्डू ने समाज को सतर्क रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दुर्गा प्रसाद चतुर्वेदी ने की। अवसर पर राम प्रकाश गुप्त, बीएन सिह, बृजेश द्विवेदी, हरिश्चंद्र बाजपेई, रणविजय सिंह, भरत गिरि, संदीप मल्होत्रा, सूर्य नारायण तिवारी, आशीष त्रिपाठी, बीनू सिंह, प्रियंका गुप्ता, अजीत पांडेय, बबलू वर्मा, शशांक श्रीवास्तव, अरुण शुक्ल, आशीष मोदनवाल, रजत सोनी, विजय वर्मा, पवन तिवारी, रवींद्र सिंह, अमित कुमार, देवेंद्र सिंह, डा. आलोक, अरविंद पांडेय आदि उपस्थित रहे।
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