Tuesday, January 13, 2026
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Manorama river के पुनर्जीवन पर ऐतिहासिक पहल शुरू!

गोंडा में जनसहभागिता और प्रशासन की मिसाल से शुरू हुआ श्रमदान अभियान

Manorama river ने जगाई नई उम्मीद, जिलाधिकारी नेहा शर्मा के नेतृत्व में उमड़ा जनसैलाब

जानकी शरण द्विवेदी

गोंडा! पौराणिक Manorama river के पुनर्जीवन के लिए शुरू हुई ऐतिहासिक पहल ने गोंडा जनपद में नई ऊर्जा और उम्मीद का संचार कर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर चल रहे एक जिला एक नदी अभियान के अंतर्गत Manorama river के पुनर्जीवन कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत जिलाधिकारी नेहा शर्मा के नेतृत्व में ब्लॉक इटियाथोक के सिसई बहलोलपुर गांव से हुई।

Manorama river केवल एक जलधारा नहीं बल्कि गोंडा और आसपास के इलाकों की सांस्कृतिक चेतना और धार्मिक आस्था का केंद्र रही है। वर्षों से उपेक्षित इस नदी को फिर से जीवन देने के उद्देश्य से आयोजित इस अभियान में 200 से अधिक ग्रामीणों, युवाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।

जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने कहा कि Manorama river हमारी संस्कृति, परंपरा और पर्यावरण के साथ जुड़ी हुई है। इसका पुनर्जीवन जनपदवासियों के स्वाभिमान से भी जुड़ा है। उन्होंने बताया कि यह केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझी जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी अंकित जैन समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

Manorama river पुनर्जीवन अभियान को प्रशासनिक समन्वय और जनभागीदारी का आदर्श मॉडल बनाने के लिए बहुआयामी योजना तैयार की गई है। नदी की गाद और अतिक्रमण को हटाने के लिए जेसीबी और पोकलैंड मशीनें लगाई गई हैं, ताकि गोण्डा-बलरामपुर रोड से लेकर ताड़ी लाल गांव तक जलधारा को निर्बाध रूप से प्रवाहित किया जा सके।

योजना के तहत Manorama river के दोनों किनारों पर पीपल, नीम, पाकड़ और अन्य देशी प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा, जिससे न केवल हरियाली बढ़ेगी बल्कि जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी। वन विभाग को वृक्षारोपण की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं सिंचाई विभाग नदी के तकनीकी आकलन और प्रवाह पथ के विकास का कार्य करेगा।

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Manorama river के पुनर्जीवन पर ऐतिहासिक पहल शुरू!
Manorama river पुनर्जीवन की शुरुआत के मौके पर मौजूद अधिकारी

जिलाधिकारी ने बताया कि Manorama river के संरक्षण में ग्राम पंचायतों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी समूहों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक चेतना और जल संरक्षण का आंदोलन बनकर उभर रहा है।

मनोरमा नदी के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए इस पहल को और भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि Manorama river का नाम महर्षि उद्दालक की पुत्री मनोरमा के नाम पर पड़ा। यह नदी गोंडा जनपद के तिर्रे ताल से निकलकर बस्ती जिले के महुली क्षेत्र में कुआनों नदी से मिलती है।

जिलाधिकारी ने कहा कि योगी सरकार के इस कदम ने पहली बार Manorama river के अस्तित्व को बचाने की दिशा में ठोस पहल की है। दशकों से उपेक्षित इस नदी के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा था, लेकिन अब इसके पुनर्जीवन ने गोंडा की धरती को नई सांस्कृतिक चेतना और पर्यावरणीय सशक्तिकरण की राह पर ला खड़ा किया है।

Manorama river के पुनर्जीवन की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण, हरित विकास और सांस्कृतिक धरोहर बचाने का प्रेरक उदाहरण बनेगी। जिलाधिकारी ने सभी लोगों से इस अभियान में अधिक से अधिक सहभागिता करने की अपील की है।

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