मशहूर यूट्यूबर मनीष कश्यप ने कहा कि अब जनता तय करे चुनाव की दिशा
मनीष कश्यप पार्टी से इस्तीफा देकर चुनावी रण में उतरे, पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए
राज्य डेस्क
पटना। मनीष कश्यप इस्तीफा देकर भाजपा को उस समय बड़ा झटका दे बैठे जब उन्होंने खुद एक वीडियो जारी करके न केवल पार्टी से अलग होने की घोषणा की, बल्कि साफ कहा कि अब वे बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब उनके भविष्य का निर्णय जनता करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा में शामिल होना उनकी एक भूल थी, जिसे अब वे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हैं।
यही नहीं, उन्होंने इस फैसले के लिए जनता से माफी भी मांगी। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर रहकर वे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने में बेबस महसूस कर रहे थे। वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनका आदर बना रहेगा, लेकिन पार्टी के भीतर के हालात ने उन्हें मजबूर किया कि वे यह कठिन निर्णय लें। मनीष कश्यप इस्तीफा एक बड़ा संदेश है कि यदि सिस्टम में सुधार की उम्मीद टूटती है तो व्यक्ति को अपने रास्ते खुद चुनने पड़ते हैं।
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उन्होंने बताया कि भाजपा में रहते हुए उन्हें यह महसूस हुआ कि वहां से वे ना तो आम लोगों की आवाज बन सकते हैं और ना ही अपनी। स्वास्थ्य विभाग जैसे मुद्दों पर जब उन्होंने आवाज उठाई तो उसे नजरअंदाज कर दिया गया। अब वे इस मुहिम को जनता के बीच लेकर जाएंगे। उनका यह भी कहना था कि भाजपा में रहते हुए वे कई बार प्रयास कर चुके कि स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक भ्रष्टाचार जैसे मामलों को ऊपर तक पहुंचाएं, लेकिन हर बार उन्हें नजरअंदाज किया गया। मनीष कश्यप इस्तीफा अब इन सभी कारणों की परिणति है।
मनीष कश्यप ने कहा कि वह जनता से सुझाव मांग रहे हैं कि उन्हें किस पार्टी से या निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ना चाहिए। यह बयान न केवल उनकी नई राजनीतिक पारी का संकेत है, बल्कि भाजपा के अंदर चल रहे असंतोष की एक और परत भी उजागर करता है। उन्होंने कहा कि पार्टी में रहकर आंख मूंदना अब संभव नहीं, और जब आप अपनी ही आंखों से भ्रष्टाचार होते हुए देखें तो चुप रहना खुद के साथ धोखा है। मनीष कश्यप इस्तीफा इसीलिए सिर्फ एक पद त्याग नहीं है, यह व्यवस्था के प्रति अविश्वास की घोषणा है।

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चुनावी संभावनाओं को लेकर उन्होंने कहा कि जनता ही उनका मार्गदर्शन करेगी। मनीष कश्यप अब सक्रिय राजनीति में पूरी मजबूती के साथ उतरने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि अगर जनता चाहती है तो वे किसी नई पार्टी से जुड़ सकते हैं या फिर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरेंगे। पार्टी छोड़ने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बेवजह प्रधानमंत्री या पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बयानबाज़ी नहीं करेंगे, लेकिन वे अब मुद्दों को और खुलकर उठाएंगे। मनीष कश्यप इस्तीफा उन तमाम युवाओं के लिए भी संदेश है जो राजनीति को बदलाव का माध्यम मानते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनीष कश्यप की यह नई पारी बिहार की राजनीति को प्रभावित कर सकती है, खासकर युवाओं और सोशल मीडिया दर्शकों के बीच उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग को देखते हुए। आने वाले दिनों में उनके अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
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