Thursday, April 2, 2026
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Lucknow News : मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर 15 करोड़ की ठगी करने वाले गिरोह के सरगना समेत तीन गिरफ्तार

लखनऊ (हि.स.)। यूपी एसटीएफ ने मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर पूरे भारत में करीब 15 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का सरगना समेत तीन अभियुक्तों को गोमतीनगर से गिरफ्तार किया है। नीट परीक्षा देने वाले लगभग 26 लाख रुपये छात्रों का अनाधिकृत डेटा बरामद हुआ है। 
एसटीएफ के प्रभारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सिसोदिया ने शनिवार को बताया कि गोमतीनगर के विजयंत खंड से मूलरुप से बिहार के दुधापुर निवासी सौरभ कुमार उर्फ सौरभ गुप्ता, लखनऊ के इन्दिरानगर निवासी डॉ. अजिताभ मिश्रा और नई दिल्ली निवासी विकास सोनी को गिरफ्तार किया है। इन अभियुक्तों के पास से पुलिस को लगभग 26 लाख छात्रों का अनाधिकृत डेटा, 19,700 रुपये और अन्य चीजें बरामद की है। 
एसएसपी ने बताया कि, पूछताछ में पता चला है कि सरगना सौरभ गुप्ता ने वर्ष 2014 मे इमेक्स ग्रुप ऑफ एजूकेशन से बीटेक करने के बाद वर्ष 2015 में आइसीएल कॉलेज आफ इंजीनियरिंग मे रीजनल निदेशक एडमिशन बिहार झारखण्ड ज्वॉइन किया। इसके बाद वर्ष 2016 मे अपनी खुद की कम्पनी राइज ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड का ऑफिस लखनऊ में प्रारम्भ किया। 
इसके बाद नीट की परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों का डेटा डॉ. अजिताभ से प्राप्त कर उस डेटा पर अपने ऑफिस से कालिंग कराकर उनको अपने ऑफिस  बुलाता था। यहा पर अपनी कम्पनी के जनरल मैनेजर के साथ मिलकर एमबीबीएस व मेडिकल पीजी दाखिला लेने के इच्छुक छात्रों व उनके परिजनों से धोखे से लोन एग्रीमेंट शाइन करा लेता था और सर्विस चार्ज के रुप में 5-6 लाख रुपया ले लेता था। 
इसके बाद छात्रों को मेडिकल कॉलेज के स्टाप की मदद से कॉलेज में काउंसिलिंग कराने के नाम पर ले जाकर विश्वास दिलाकर फिर से रुपयों की ठगी करता था। वर्ष 2020 मे भी उन लोगों ने रायबरेली निवासी अशोक सिंह से 05 लाख रुपये, आजमगढ़ निवासी पवन यादव से 09 लाख रुपये, बिहार के पटना में रहने वाला संजीव से 20 लाख रुपये, एटा निवासी ममतेश शाक्य से 06 लाख रुपये लिए है। 
15 करोड़ की ठगी की जा चुकी 

इस गिरोह का जाल दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, कर्नाटका, आन्ध्र प्रदेश महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि राज्यों मे फैला हुआ है। गिरफ्तार अभियुक्त की अन्य अपराधिक गतिविधियों के सम्बन्ध में जानकारी की जा रही है। प्राप्त डेटा का फॉरेंसिक आडिट कराया जायेगा। डेटा बीच कहां से हुआ है इस सम्बन्ध में भी जांच की जा रही है। बैंक का एकाउन्ट डिटेल प्राप्त करके कुल धोखााधड़ी के सम्बन्ध में जानकारी की जा रही है। इस गैंग द्वारा लगभग 15 करोड़ की ठगी की जा चुकी है। 
 

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