लखनऊ (हि.स.)। क्रोमियम एक अत्यधिक जहरीली धातु है जो मनुष्यों में कैंसर का कारण बनती है। क्रोमियम प्रदूषण का मुख्य स्रोत चमड़े का उद्योग है, जिसमें क्रोमियम का इस्तेमाल टैनिंग एजेंट के रूप में किया जाता है। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के डॉ पंकज कुमार अरोड़ा ने एक ऐसे जीवाणु की पहचान की है, जो अत्यधिक विषैले क्रोमियम को कम विषैले क्रोमियम में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है।
इस बैक्टीरिया को जीनस बेसिलस के एक सदस्य के रूप में पहचाना जाता है जो 1000 पीपीएम के अत्यधिक विषाक्त क्रोमियम को कम विषाक्त क्रोमियम में परिवर्तित करने में सक्षम है। क्रोमियम परिवर्तन में शामिल जीनों की पहचान जीनोम अनुक्रमण द्वारा की गई। क्रोमियम की विषाक्तता को कम करने में उनका ये शोध बहुत सहायक सिद्ध हुआ है। इस शोध को ‘डेटा इन-ब्रीफ़’ नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
डॉ पंकज कुमार अरोड़ा को स्टैंडफोर्ड विश्वविद्यालय के शीर्ष वैज्ञानिकों की सूची में शामिल होने का गौरव प्राप्त है और हाल ही में उन्हें भारतीय वनस्पति समाज की पत्रिका में संपादकीय बोर्ड के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया हैं।
Lucknow News : डाॅ. अरोड़ा ने खोजा ऐसा बैक्टीरिया, जो घातक क्रोमियम प्रदूषण को कर सकता है कम
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