लखनऊ (हि. स.)। टट्टर, चैली, सीढ़ी बनाने के काम आने वाला बांस के मूल्य में बढ़ोत्तरी हुई है। गांव से शहर तक पहुंचनेमें बांस 30 रुपये तक महंगा हुआ है।
लखनऊ में तेलीबाग, आलमबाग, डालीगंज, ठाकुरगंज, बख्शी का तालाब जैसे प्रमुख स्थानों पर बड़े पैमाने पर बांस की खरीद बिक्री होती है। गांव क्षेत्र से हरे बांस को काटकर लाया जाता है और इन जगहों पर पुराने दुकानदार उन्हें खरीदते हैं। इसके बाद दुकानदार बांस को 12, 15 दिनों तक सुखा कर टट्टर, चैली, सीढ़ी और डंडी बनाने का काम करते हैं।
डालीगंज पुल के पास बांस का काम करने वाले रामाश्रय बताते हैं की गांव से कटने वाले हरे बांस की कीमत तो कम रहती है लेकिन उसे यहां तक पहुंचाने में भाड़ा लग जाता है। इधर बीच भाड़ा बढ़ जाने के कारण बांस की कीमतें भी बढ़ गई है।
उन्होंने बताया कि बांस की वर्तमान में कीमत 100 से 125 रुपए तक पहुंच गई है। जो और मौसम से 30 रुपये ज्यादा है। इधर बांस की कीमतें बढ़ गई है तो उससे जुड़े हुए सामग्रियों की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
तेलीबाग में टट्टर बनाने वाले सुनील ने बताया कि गर्मियों में टट्टर की बिक्री बढ़ जाती है। इस समय एक टट्टर 90 रुपए का बिक रहा है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी इसके दाम में बढ़ोतरी होगी।
उन्होंने बताया कि चैली 50 रुपए की बिक रही है। 10 डंडे की सीढ़ी 350 रुपये में वर्ष के हर समय बिकती मिलेगी। वही झण्डा लगाने वाली डंडी 100 में 100 मिल रही है।
बता दें कि बांस का बड़ा कारोबार करने वाले लोगों को बड़ा टैक्स भी देना पड़ता है। इसके लिए अधिकतर खरीदारों को बिल दिया जाता है, जिसका वार्षिक हिसाब किताब होता है।
