Thursday, April 2, 2026
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Kanpur News : सीएसए की वित्तीय अनियमितताओं का शासन ने लिया संज्ञान, समिति करेगी जांच


– अपर आयुक्त प्रशासन की अध्यक्षता में बनायी गयी समिति- विश्वविद्यालय के अर्थ नियंत्रक ने शासन को लिखा था पत्र

कानपुर (हि.स.)। सीएसए के अर्थ नियंत्रक द्वारा लगातार किये जा रहे पत्राचार को शासन ने संज्ञान ले लिया है। शासन के निर्देश पर सीएसए में व्याप्त वित्तीय अनियमितताओं की जांच पर समिति का गठन कर दिया गया है। समिति कि अध्यक्ष कानपुर मण्डल के अपर आयुक्त प्रशासन होंगे जो एक माह के अंदर शासन को रिपोर्ट सौंपेगें। 
चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के वित्त नियंत्रक का आरोप है कि विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जिसके चलते विश्वविद्यालय के राजस्व का नुकसान हो रहा है। वित्त नियंत्रक ने संबंधित मंत्री से लेकर शासन को पत्राचार किया। जिसके बाद शासन ने मामले को संज्ञान में लिया और कानपुर मण्डल के अपर आयुक्त प्रशासन की अध्यक्षता में समिति का गठन कर दिया। समिति में सदस्य के रुप में अपर आयुक्त वित्त और सीएसए के वित्त नियंत्रक हैं। एक माह में जांच कर समिति को रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। सीएसए के अर्थ नियंत्रक के मुताबिक विश्वविद्यालय के कुलपति एवं प्रशासन द्वारा मनमाने ढंग से काम करते हुए राज्य की संचित निधि का दुरुपयोग किया जा रहा है और नियम विरुद्ध कार्य किए जा रहे हैं। बताया कि कृषि ज्ञान केंद्रों की समाप्ति के उपरांत कृषि विज्ञान केंद्रों में समायोजित उनके समन्वयको/वैज्ञानिकों को नियुक्ति की तिथि से यूजीसी लाभ दिया जाना नियमों के विपरीत है, जिस कारण प्रबंध मंडल के 159 वीं बैठक में प्रस्ताव विचारोंपरांत अस्वीकृत कर दिया गया था, परंतु विश्वविद्यालय में शिक्षणेत्तर कार्मिकों को शैक्षणिक कार्मिकों की भांति यूजीसी वेतन के लाभ नियम विरुद्ध आज भी दिए जा रहे हैं। लगभग 20 वर्षों से यह अनियमितता जानबूझकर की जा रही है। इसी आधार पर इन कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति लाभ भी मिल रहे हैं। इसी प्रकार कृषि विज्ञान केंद्रों को में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, विषय वस्तु विशेषज्ञ को छठे वेतन आयोग में वेतन 5400 ग्रेड पे प्रदान किया गया था परंतु विश्वविद्यालय द्वारा विषय वस्तु विशेषज्ञों को नियम विरुद्ध गलत सूचना के आधार पर यूजीसी वेतनमान 6000 ग्रेड पे दिया जा रहा है। शोध सहायकों को शिक्षणेत्तर कार्मिक होते हुए भी शैक्षणिक कार्मिकों के भांति यूजीसी के लाभ अनुमन्य किए गए जिसके कारण राज्य की संचित निधि से अधिक भुगतान पर स्थानीय लेखा निधि लेखा परीक्षा विभाग द्वारा ऑडिट आपत्ति भी व्यक्ति की गई है।

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