जमीअत उलमा शहर कानपुर की जानिब से मुस्लिम व गैर मुस्लिम बेहद गरीब लोगों को कम्बल रजाई बांटी गई
कानपुर (हि.स.)। अल्लाह के आखिरी नबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत का अहम पहलू लोगों की सेवा है, बिना भेदभाव धर्म, पंथ, वर्ग, समुदाय, जात और मस्लक के अनाथों, विधवाओं, मरीजों गरीबों, बेसहारा और कमजोरों का ख्याल रखना उनके साथ हमदर्दी, अच्छा व्यवहार और उनकी मदद इस्लाम की महत्वपूर्ण शिक्षाओं में है।
इन विचारों को जमीअत उलमा कानपुर के महासचिव मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह कासमी ने आज बकरमंण्डी ढाल पर बिना भेदभाव धर्म-वर्ग के सैकड़ों बेहद गरीब और कमजोर लोगों को जमीअत उलमा की तरफ से रजाई व कम्बल वितरित करते हुए किया।
उन्होंने कहा कि हजरात सहाबा किराम रजि0, औलिया अल्लाह और बुजुर्गों ने इस लाइन से शानदार नमूना छोड़ा है, हम भी उसी नक्षे कदम पर चलकर हर कमजोर के काम आने वाले बनें। हम को चाहिए कि हम अपने अल्लाह को खुश करें, अल्लाह अपने बन्दों की सेवा करने वालों से राजी होते हैं और बहुत खुश होते हैं।
मौलाना ने शहर के लोगों से अपील की कि नफरत फैलाने वाले चंद सरफिरें लोगों से प्रभावित ना हों, बुजुर्गाें के नक्षे कदम पर चलते हुए जमीअत उलेमा हिन्द की सोच से जुड़ें और मानवता की सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनायें और व्यवहारिक रूप से भी यह ऐलान कर दें कि ना कोई हमारा दुश्मन है, ना हम किसी के दुश्मन हैं, हमारा काम मुहब्बत और खिदमत है और हम इसी पैगाम को आम करते रहेंगे।
इस अवसर पर मौलाना इनामुल्लाह कासमी, मौलाना फरीदुद्दीन कासमी, मुफ्ती अबुहुरैरह फैसल कासमी, मौलाना कनाअतुल्लाह मजाहिरी, मौलाना जमील नदवी, मौलाना जमीर नदवी, मौलाना ऐजाज नदवी, मौलाना सनाउल्लाह जामई के साथ ही बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग मौजूद थे। क्षेत्रीय लोगों ने जमीअत के इस काम को सराहते हुए खुशी का इजहार किया।
