बच्चों और बुजुर्गों को ऐसे मौसम में विशेष सावधानी बरतने की है जरुरत
कानपुर (हि.स.)। सर्दी के बाद बसंत ऋतु शुरु हो गयी है और दिन में जहां तापमान अधिक रहता है तो वहीं रात का तापमान घट रहा है। मौसम के ऐसे बदलाव से रुबैला वायरस का खतरा बढ़ गया है। यह वायरस खासकर बच्चों और बुजुर्गों को जल्दी पकड़ता है, जिससे विशेष सावधानी की जरुरत है। इसका बेहतर इलाज होम्योपैथी में भी है। यह बातें बुधवार को वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक डा. हेमंत मोहन ने कही।
उन्होंने बताया कि रुबैला (खसरा) जिसे मीजल्स के नाम से भी जाना जाता है, बच्चों की एक गंभीर संक्रामक बीमारी है। यदि इसका समय से उपचार न किया जाए तो ये जानलेवा भी साबित हो सकती है। खसरा वैसे तो किसी भी मौसम में हो सकता है परंतु इस बदलते मौसम में इसके सक्रिय होने की संभावना अधिक हो जाती है। इसलिए इस मौसम में ज्यादा सतर्क रहने की जरुरत है। वैसे तो टीकाकरण से इस पर रोक अवश्य लगी है परंतु अभी भी बड़ी संख्या में बच्चे और बड़े इससे ग्रसित हो रहे हैं। डा. आरती मोहन ने बताया कि खसरा किसी को भी हो सकता है परंतु बच्चों में इसके संक्रमण की संभावना ज्यादा होती है। बताया कि युवाओं, कुपोषित बच्चों, टीके से वंचित बच्चों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसके फैलने की संभावना ज्यादा होती है। इसमें कुछ प्रमुख लक्षण ये हैं कि चार से पांच दिन पहले बुखार होना, जुखाम होना, नाक से पानी बहना, सिरदर्द, मिचली, जोड़ो में दर्द जैसे लक्षण होते हैं।दवाई खाने से पहले चिकित्सक की लें सलाह
डा. हेमंत मोहन ने बताया कि खसरे का टीकाकरण समय से करवाना चाहिए और खसरे से प्रभावित लोगों को अलग रखना चाहिए। बिना चिकित्सक की सलाह लिए भी दवा लेना खतरनाक हो सकता है और होम्योपैथी में इसका पूरी तरह से उपचार संभव है।
