हरियाणा में प्रस्तावित नए कानून से दंपतियों में हड़कंप, DC से लेनी होगी अनुमति
IVF पर हरियाणा सरकार ने कहा-बिना मंजूरी नहीं मिलेगा बच्चा पैदा करने का अधिकार
राज्य डेस्क
चंडीगढ़! हरियाणा सरकार ने IVF तकनीक को लेकर एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसने पूरे राज्य में चर्चाओं का तूफान खड़ा कर दिया है। अगर कोई दंपति इस तकनीक के जरिए बच्चा पैदा करना चाहता है और उसके पास पहले से ही एक जीवित बेटी है, तो उसे जिला उपायुक्त से अनुमति लेनी होगी। यही नहीं, अगर किसी दंपति के पास पहले से एक बेटा और एक बेटी दोनों हैं, तब भी इस तकनीक के जरिए तीसरा बच्चा पैदा करने के लिए उन्हें पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
यह प्रस्ताव मंगलवार को आयोजित राज्य टास्क फोर्स (एसटीएफ) की बैठक में सामने रखा गया। बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने की। इस बैठक में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान को मजबूत करने और राज्य के लिंगानुपात को सुधारने पर विशेष फोकस रखा गया।
IVF तकनीक के इस नए नियम को लेकर अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल यह नीति विचार के स्तर पर है। अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने बताया कि अभी IVF से जुड़े इस प्रस्ताव पर विस्तृत दिशानिर्देश और प्रक्रिया तैयार की जाएगी। उनका कहना था कि इसका दुरुपयोग न हो, इसके लिए कड़ा नियंत्रण जरूरी है। हरियाणा में लिंगानुपात पहले ही काफी संवेदनशील मुद्दा रहा है।
हालिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य में इस वर्ष 7 जुलाई तक लिंगानुपात बढ़कर 904 पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 903 था। IVF नीति का मुख्य उद्देश्य लिंगानुपात में सुधार और सामाजिक संतुलन बनाए रखना है। बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को गर्भावस्था के 24 सप्ताह तक हुए गर्भपातों की रिवर्स ट्रैकिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
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राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि IVF के जरिये बच्चा पैदा करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी सख्ती जरूरी है। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि दोषी डॉक्टरों के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएं। इतना ही नहीं, अवैध गर्भपात में शामिल आयुर्वेदिक चिकित्सकों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भी आदेश दिया गया।
गौरतलब है कि हाल ही में नूंह जिले में दो नर्सिंग होम को अवैध गर्भपात के आरोप में सील किया गया था। राज्यभर में अब तक करीब 500 अवैध चिकित्सीय गर्भपात केंद्रों को बंद किया जा चुका है। इसका सीधा असर यह हुआ कि पिछले दो महीनों में वैध MTP (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी) में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
राज्य सरकार की इस नई योजना ने IVF के जरिये बच्चा पैदा करने की प्रक्रिया को और भी जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम समाज में लैंगिक असमानता को कम करने के लिए उठाया गया है। हालांकि, कई लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखल मानते हैं। IVF तकनीक से बच्चा पाने की ख्वाहिश रखने वाले दंपतियों में इस प्रस्ताव के बाद बेचैनी बढ़ गई है।
इस प्रस्ताव ने IVF प्रक्रिया और प्रजनन अधिकारों पर एक नई बहस छेड़ दी है। सरकार का फोकस साफ है कि IVF तकनीक का दुरुपयोग किसी भी सूरत में न हो और लिंगानुपात में सुधार लाया जा सके। अब देखना होगा कि यह नीति भविष्य में किस तरह लागू की जाती है और इसका समाज पर क्या असर पड़ता है।
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