अमेरिका से चिकित्सा आपूर्ति की पहली खेप अगले दो दिनों में यानी शुक्रवार तक भारत पहुंच जाने की उम्मीद है, जिसमें करीब 740 करोड़ से अधिक के सामान हैं।अमेरिका ऑक्सीजन उत्पादन प्रणाली और टीकों के लिए कच्चे माल सहित चीजों पर करीब 100 मिलियन यानी करीब 741.66 करोड़ से अधिक की कीमत की आपूर्ति कर रहा है।
भारत के लिए इमरजेंसी रिलीफ आपूर्ति की पहली खेप अमेरिकी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के जरिए त्राविस एयर फोर्स बेस से भारत आ रही है। इसमें 440 ऑक्सीजन सिलेंडर और रेगुलेटर्स हैं। इस फ्लाइट में 960,000 रैपिड कोरोना टेस्ट किट है और करीब 1 लाख एन95 मास्क हैं।
व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान के अनुसार, अमेरिका ने कोविशील्ड वैक्सीन के भारतीय निर्माण के लिए आवश्यक जरूरी कच्चे माल की पहचान की है जो तुरंत भारत के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।
अमेरिका के अलावा, रूस, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, बेल्जियम, रोमानिया, लक्समबर्ग, सिंगापुर, पुर्तगाल, स्वीडन, न्यूजीलैंड, कुवैत और मॉरीशस सहित कई प्रमुख देशों ने भारत को महामारी से लड़ने में मदद करने के लिए मेडिकल सहायता की घोषणा की है। सिंगापुर ने मंगलवार को भारत को 256 ऑक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति की।
नॉर्वे सरकार ने भारत में कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों की मेडिकल सेवा के लिए 24 लाख अमेरिकी डॉलर के योगदान का ऐलान किया। स्विटज़रलैंड ने बुधवार को कहा कि वह कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न “चुनौतीपूर्ण समय” से निपटने में मदद करने के लिए भारत को ऑक्सीजन सांद्रक, वेंटिलेटर और अन्य चिकित्सा उपकरण भेज रहा है।
