कदाचार के आरोपी 13 विवेचक निलंबित, तीन अन्य भी निशाने पर
सभी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश, दुघर्टना के मामलों में कर रहे थे हेराफेरी
अतुल भारद्वाज
गोंडा। देवीपाटन रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) ने थानों में दर्ज दुघर्टना के मुकदमों की विवेचना में पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करने के आरोपी देवीपाटन मंडल के एक निरीक्षक व 12 उपनिरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। तीन अन्य विवेचकों के निलंबन की कार्यवाही प्रक्रिया में है। इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। यह जानकारी शुक्रवार को एक पुलिस अधिकारी ने दी।
आईजी अमित पाठक ने बताया कि यह कार्रवाई एक बीमा कंपनी के अधिकारी राजेंद्र प्रताप सिंह की शिकायत पर की गई। शिकायत में कहा गया था कि परिक्षेत्र के विभिन्न थानों के विवेचक वाहन स्वामियों से अनुचित लाभ लेकर सड़क हादसे के वास्तविक वाहनों और आरोपियों को बदल देते थे। वे हादसों को अंजाम देने वाले बिना बीमित वाहनों व बिना लाइसेंस वाले चालकों के स्थान पर बीमित वाहनों व वैध लाइसेंसी व्यक्ति को चालक दिखाकर आरोपी पक्ष को अभियोग में अनुचित लाभ पहुंचाते थे। ऐसा करने से बीमा कंपनी को क्लेम भी देना पड़ता था।
आईजी ने बताया कि इस शिकायत पर उन्होंने दुघर्टना के ऐसे मामलों की जांच के लिए एक एसआईटी गठित की। एसआईटी की जांच में एक निरीक्षक व 15 उपनिरीक्षकों को आरोपी पक्ष से दुरभिसंधि करके विवेचना करने का दोषी पाया गया। इनमें बहराइच के 10, श्रावस्ती के चार तथा गोंडा के दो विवेचक शामिल हैं। जिन विवेचकों को निलंबित किया गया है, उनमें बहराइच के हरदी थाने के उपनिरीक्षक अरुण पांडेय, रामगांव के संजीव द्विवेदी, नवाबगंज के अशोक जायसवाल, मटेरा के तेज नरायन यादव व राकेश कुमार, नानपारा के राजेश्वर सिह, रामगांव के रूप नरायन गौड़, मोतीपुर के विजय यादव व दिवाकर तिवारी तथा बौंडी के मेहताब आलम शामिल हैं।
आईजी के अनुसार, श्रावस्ती जिले में भिनगा के निरीक्षक योगेश सिंह व उपनिरीक्षक गुरुसेन सिंह तथा इकौना उपनिरीक्षक द्वय शैलेश त्रिपाठी व प्रेमचंद को दोषी पाया गया है। गोंडा जिले के खरगूपुर थाने के उपनिरीक्षक शेषनाथ पांडेय व इटियाथोक के शशांक मौर्य भी कदाचार के दोषी पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि निलंबित विवेचकों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। अन्य के खिलाफ कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। आई ने बताया कि सभी अभियोगों में दुबारा विवेचना करवाकर वास्तविक अभियुक्त व वाहनों के खिलाफ ही परिणाम न्यायालय प्रेषित किए गए।
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