संयोग नहीं ये प्रयोग है, नकली गांधी परिवार विश्वास योग्य नहीं। 2003 में चीनी राष्ट्रपति हू जिन्ताओ ने अपने एक भाषण में चीन की मलक्का डिलेमा अर्थात मलक्का उलझन का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती हिंद महासागर में मौजूद मलक्का स्ट्रेट या जलडमरूमध्य है, जो हिंद महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ता है। पूरे विश्व के समुद्री व्यापार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा इसी मलक्का स्ट्रेट से होकर गुजरता है। चीन का लगभग 80 प्रतिशत समुद्री व्यापार इसी मलक्का स्ट्रेट से होता है। अतः यह उसके लिए रणनैतिक और व्यापारिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन ने एड़ी चोटी का दम लगा डाला है लेकिन वो आज तक इस समुद्री मार्ग का दूसरा विकल्प नहीं ढूंढ पाया है।
इस मलक्का स्ट्रेट के ठीक उत्तर पश्चिम में भारत का निकोबार द्वीप समूह है। यहां से भारत इस पूरे क्षेत्र पर नियंत्रण करता है जो कि चीन के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात है। चीन हमेशा इस चिंता में रहता है कि यदि भारत से संघर्ष के दौरान भारतीय नौसेना ने इस मलक्का स्ट्रेट को चोक कर दिया तो चीन का भट्टा बैठ जाएगा। इस निकोबार द्वीप समूह का सबसे दक्षिणी द्वीप ग्रेट निकोबार है। भारत सरकार इस ग्रेट निकोबार द्वीप पर 72000 करोड़ की लागत से एक बहुत बड़ा नौसैनिक बेस और एक व्यापारिक बंदरगाह बनाने जा रही है। इस प्रोजेक्ट का नाम ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट है, जिसके द्वारा भारत इस मलक्का स्ट्रेट से होने वाले समुद्री व्यापार पर संपूर्ण नियंत्रण करना चाहता है। जाहिर सी बात है कि इस तरह के किसी भी प्रोजेक्ट से सबसे अधिक दिक्कत केवल चीन को ही होनी चाहिए, क्योंकि भारत का यह प्रोजेक्ट चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। चीन ने इस प्रोजेक्ट को रोकने के लिए पूरा दम-खम लगा रखा है।
अंग्रेजी अखबार ‘द हिन्दू’ में सोनिया गांधी का एक लेख प्रकाशित हुआ है। इसमें उन्होंने इस ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को भारत के पर्यावरण, इकोलॉजी, समुद्री जैव विविधता और आदिवासी हितों के लिए खतरा बताया है। उनके अनुसार यह प्रोजेक्ट नहीं बनना चाहिए और पूरे देश को इसके खिलाफ खड़ा हो जाना चाहिए। सोनिया गांधी के इस लेख के प्रकाशित होने के उपरांत पूरा कांग्रेसी और वामपंथी इकोसिस्टम एक्टिव हो चुका है। इस टूलकिट गैंग द्वारा इस प्रोजेक्ट को लेकर अलग-अलग प्रकार की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। हाल ही में राहुल गांधी की एक तस्वीर वायरल हुई थी जिसमें वो मलेशिया के लंकावी द्वीप पर दिख रहे थे। यह द्वीप बेहद ही गोपनीय अंतराष्ट्रीय बैठकों के लिए जाना जाता है। ग्रेट निकोबार द्वीप मलेशिया के एकदम पास में ही है। ऐसे में राहुल गांधी का वहां जाना, फिर सोनिया गांधी का यह लेख प्रकाशित होना, फिर टूलकिट गैंग द्वारा इस प्रोजेक्ट के खिलाफ धावा बोल देना।
यह मात्र संयोग तो नहीं हो सकता है। तो क्या राहुल गांधी का मलेशिया का यह गुप्त दौरा चीन के इशारों पर हो रहा है? क्या उनके द्वारा लंकावी द्वीप पर चीनियों के साथ गोपनीय मुलाकात हुई है? क्योंकि मुझे नहीं लगता है कि चीन के अलावा अन्य किसी को इस प्रोजेक्ट से कोई परेशानी है। मुझे अंदेशा है कि कुछ दिन बाद ग्रेट निकोबार, अंडमान और भारत के अन्य आदिवासी इलाकों में आदिवासी आंदोलन जैसी कुछ नौटंकी चलाई जा सकती है। इस प्रोजेक्ट के खिलाफ तमाम भ्रम फैलाए जाएंगे जैसे कि मोदी द्वारा इस प्रोजेक्ट को अडानी और अंबानी के फायदे के लिए बनवाया जा रहा है, आदिवासियों को उजाड़ दिया गया है, इत्यादि इत्यादि। भारत को इसके लिए काफी सचेत रहने की आवश्यकता है। ये चीनी दलाल उसके इशारों पर कुछ भी कर सकते हैं। इस देशद्रोही खानदान के इन गोपनीय विदेशी दौरों की गहराई से जांच की जानी चाहिए।
(ये लेखक के निजी विचार हैं।)
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