पूरे दिन प्राइवेट बस अड्डा बना रहता है रोडवेज बस स्टेशन
जिले में धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं डग्गामार वाहन, कोई नहीं है पुरसाहाल
जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। जिले के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ), यातायात पुलिस तथा नागरिक पुलिस की कृपा से जिले में डग्गामार वाहनों की भरमार है। रोडवेज बस स्टेशन पूरे दिन प्राइवेट बसों का अड्डा बना रहता है। जिले के प्रमुख मार्गों पर बिना फिटनेस के सड़कों पर प्राइवेट बसें दौड़ रही हैं। शासन के सबसे बड़े नौकरशाह मुख्य सचिव के आदेश के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं नहीं रेंगता है।
जानकार बताते हैं कि एआरटीओ, पुलिस और यातायात पुलिस की कृपा से पूरे जनपद में डग्गामार वाहनों का संचालन हो रहा है। अनेक वाहन तो बिना फिटनेस के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों से कब और कहां दुघर्टना हो जाय, कुछ कहा नहीं जा सकता, किन्तु जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जान बूझकर करके भी चुप बने हुए हैं। शहर के मध्य स्थित रोडवेज बस स्टेशन के आसपास ही पूरे दिन प्राइवेट बसों का जमावड़ा लगा रहता है। यह बसें रोडवेज को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा रही हैं। पिछले एक दशक के दौरान कई बार बस स्टेशन के पास से प्राइवेट बसों के अवैध जमावड़े को शहर के बाहरी इलाके में किया गया किन्तु कुछ माह के बाद स्थिति पुनः जस की तस बन जाती है। वर्ष 2011 में तत्कालीन जिलाधिकारी राम बहादुर ने रोडवेज बस स्टेशन के पास से अवैध अतिक्रमण हटवाने के बाद वहीं पर एक पुलिस चौकी स्थापित करवा दिया था, जिससे बस स्टेशन पर यात्रियों की रात्रि में सुरक्षा भी हो सके और मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखते हुए प्राइवेट बसों को यहां पर खड़े न होने दिया जाय। उनके तबादले के बाद पहले पुलिस ने एक-एक करके बसों को यहां पर सवारी भरने की अनुमति दी और धीरे-धीरे बहराइच, अयोध्या, उमरी बेगमगंज, पकड़ी बंधा आदि मार्गों पर चलने वाली बसें नियमित रूप से यहीं पर खड़ी होकर सवारी भरने लगीं। रोडवेज के चालक, परिचालकों तथा निजी बस मालिकों के बीच सवारी भरने को लेकर अक्सर मारपीट हो जाया करती है। कई बार इसके लिए रोडवेज कर्मचारी हड़ताल भी कर चुके हैं।
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इस सम्बंध में 28 नवम्बर 2013 को तत्कालीन मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजकर राष्ट्रीयकृत मार्गों पर अनधिकृत बसों का संचलन प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया था। इसी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि सभी डीएम और एसपी एआरटीओ व एआरएम के साथ समन्वय स्थापित करके प्राइवेट वाहनों का संचालन परिवहन निगम के बस अड्डे से कम से कम एक किमी. दूर से संचालित कराएंगे। इस आदेश का अनुपालन करते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी डा. रोशन जैकब के प्रयास से निजी वाहनों का ठहराव शहर के बाहरी क्षेत्रों में बनाया गया। तत्समय लागू की गई व्यवस्था के अनुसार, बहराइच मार्ग की तरफ जाने वाले वाहनों का ठहराव कुष्ठ सेवा केन्द्र के पास बनाया गया था। बलरामपुर की तरफ जाने वाले वाहनों का ठहराव ओवर ब्रिज के पार बनाया गया था। उतरौला रोड के वाहनों का ठहराव मनकापुर बस स्टैण्ड के पास बनाया गया था। लखनऊ मार्ग के वाहनों का ठहराव कचहरी के पास पीएसी गेट के निकट तथा बेलसर व अयोध्या मार्ग के वाहनों का ठहराव झंझरी ब्लाक के पास बनाया गया था। बलरामपुर और उतरौला मार्ग के लिए बनाई गई व्यवस्था तो किसी तरह चल रही है किन्तु अन्य मार्गों के लिए यह कानून ज्यादा दिन लागू नहीं रह सका और रोडवेज बस स्टेशन एक बार फिर प्राइवेट वाहनों का अड्डा बन गया। कुछ समय बाद आए अधिकारियों ने थोड़ी कसरत की तो रोडवेज बस स्टेशन को अवैध बस अड्डा बनने से रोकने की दिशा में कार्रवाई करते हुए 100 मीटर दूरी पर एक और चौकी स्थापित कर दी, जो अब गुरुनानक चौक पुलिस चौकी के नाम से जानी जाती है। किन्तु कहते हैं कि ज्यों-ज्यों दवा की मर्ज बढ़ता ही गया की तर्ज पर डग्गामारी रोकने के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती तो बढ़ती गई लेकिन अवैध बस स्टेशन नहीं हट सका।

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वर्तमान में स्थिति यह है कि दोनों पुलिस चौकियों के मध्य पूरे दिन भयंकर जाम लगा रहता है क्योंकि रोडवेज की बसां के साथ-साथ प्राइवेट बसें भी न केवल यहीं पर खड़ी होकर सवारियां भरती हैं, बल्कि प्राइवेट बसें रोडवेज बसों के आगे-आगे चलती हैं। डिग्री कालेज चौराहे से बस स्टेशन को जाने वाली करीब 200 मीटर लम्बी सड़क पर किसी भी समय दर्जन भर बसें खड़ी मिल जाएंगी। इसी प्रकार बहराइच मार्ग की प्राइवेट बसें भी शर्मा होटल के सामने ही खड़ी हुआ करती हैं। कुछ मिलाकर एक तरफ जहां मुख्य सचिव प्राइवेट वाहनों का संचालन रोडवेज बसों से एक किमी दूर से किए जाने का निर्देश देते हैं, वहीं इसका अनुपालन कराने वाले जिम्मेदार अधिकारी निजी स्वार्थ के कारण इस आदेश से मुंह मोड़े हुए हैं। रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक का कहना है कि डग्गामार वाहनों के संचालक रोडवेज बस स्टेशन कैंपस से यात्री उठा ले जाते हैं। अवैध वाहनों का संचालन यहां से हटाने के लिए समय-समय पर प्रशासन, पुलिस और एआरटीओ को पत्र लिखा जाता है किन्तु समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है। रोडवेज अधिकारियों की मानें तो डग्गामार वाहनों की धरपकड़ में एआरटीओ और पुलिस की ओर से कोई सहयोग नहीं मिलता है। एआरटीओ को अन्य मार्गों पर भी डग्गामार वाहन नहीं दिखाई पड़ते हैं। सबकी आंखें डग्गामार वाहनों की धरपकड़ के नाम पर बंद हो चुकी हैं। कुल मिलाकर वर्तमान स्थिति में रोडवेज को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इस सम्बंध में पूछे जाने पर नगर मजिस्ट्रेट अर्पित गुप्ता ने बताया कि जल्द ही वह एआरटीओ, एआरएम रोडवेज, नगर कोतवाल, यातायात निरीक्षक, दोनों चौकी प्रभारियों तथा नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी की बैठक बुलाकर समस्या पर चर्चा करके इसका स्थायी समाधान कराएंगे।
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