प्रदीप शुक्ला
धानेपुर, गोण्डा। भाई बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षा बन्धन बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, बाज़ार में राखी और मिठाइयों की दुकानें सजी रही जहां बहनों ने अपने भाइयों के लिए रक्षा बन्धन और मिठाइयों की जमकर खरीददारी की तो वही भाई भी अपनी बहनों को तोहफा देने के लिए विभिन्न प्रकार के उपहारों की खरीददारी करते नज़र आये, देश में रक्षा बन्धन का त्यौहार सर्वाधिक लोक प्रिय माना जाता है आज के दिन बहने अपने भाइयों की सूनी कलाई पर राखी बाँधने के लिए ससुराल से मायके पहुंचती हैं, मौसम चाहे जैसा हो परिस्थितियां कैसी ही हों दूरी कितनी भी हो मग़र ये सभी बाधाएं लांघ कर रक्षा सूत्र भाइयों की कलाई पर बाँधी जाती है। इस महापर्व पर उन उदास चेहरों पर भी ये बहने मुस्कान बिखेरती हैं जिन्हें इश्वर ने बहन के प्रेम से वंचित रखा है। प्रेम वात्सल्य की प्रतिमूर्ति बहनों की दृष्टि जहां तक जाती है ऐसे किसी भी भाई की कलाई को वो सूनी नही रहने देती हैं। पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह त्यौहार भाई का बहन के प्रति प्यार का प्रतीक है। इस दिन बहन अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधती है और उनकी दीर्घायु व प्रसन्नता के लिए प्रार्थना करती हैं ताकि विपत्ति के दौरान वे अपनी बहन की रक्षा कर सकें। बदले में भाई, अपनी बहनों की हर प्रकार के अहित से रक्षा करने का वचन उपहार के रूप में देते हैं। इन राखियों के बीच शुभ भावनाओं की पवित्र भावना होती है। यह त्यौहार मुख्यतः उत्तर भारत में मनाया जाता है। रक्षा बंधन का इतिहास हिंदू पुराण कथाओं में है। हिंदू पुराण कथाओं के अनुसार, महाभारत में जो कि एक महान भारतीय महाकाव्य है, पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की कलाई से बहते खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर बांधा था। इस प्रकार उन दोनो के बीच भाई और बहन का बंधन विकसित हुआ था, तथा श्री कृष्ण ने उसकी रक्षा करने का वचन दिया था। यह जीवन की प्रगति और मैत्री की ओर ले जाने वाला एकता का एक बड़ा पवित्र कवित्त है। रक्षा का अर्थ है बचाव, और मध्यकालीन भारत में जहां कुछ स्थानों पर, महिलाएं असुरक्षित महसूस करती थी, वे पुरूषों को अपना भाई मानते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधती थीं। इस प्रकार राखी भाई और बहन के बीच प्यार के बंधन को मज़बूत बनाती है, तथा इस भावनात्मक बंधन को पुनर्जीवित करती है। इस दिन ब्राह्मण अपने पवित्र जनेऊ बदलते हैं और एक बार पुनः धर्मग्रन्थों के अध्ययन के प्रति स्वयं को समर्पित करते हैं।

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