स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर खिलाएंगे अल्बेंडाजोल व डीईसी की गोली
फाइलेरिया रोधी दवा का करेंगे सेवन, तभी देश से होगा फाइलेरिया बीमारी का उन्मूलन
जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। शासन द्वारा फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के फाइलेरिया रोग से प्रभावित कुल 51 जनपदों में से गोंडा जनपद समेत 19 जनपदों में माह मई में सर्वजन दवा सेवन (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी एमडीए) कार्यक्रम चलाया जाना सुनिश्चित किया गया है। इसमें दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अत्यंत वृद्ध व बीमार व्यक्तियों को छोड़कर जनपद की शत-प्रतिशत आबादी को स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने सामने डीईसी एवं अल्बेंडोजोल की गोली खिलाना सुनिश्चित करेंगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आरएस केसरी ने बताया कि एमडीए कार्यक्रम के दौरान फाइलेरिया मुक्ति की दवा का वितरण नहीं किया जाएगा बल्कि इसे आशा घर-घर जाकर अपने सामने खिलाएंगी। फाइलेरिया से मुक्ति के लिए दो तरह की दवा- डीईसी एवं अलबेंडाजोल खिलाई जाएगी। अभियान के बारे में जन-जागरुकता बढ़ाने में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, पंचायती राज विभाग एवं शिक्षा विभाग के साथ पीसीआई संस्था की अहम भूमिका होगी। एमडीए कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु पीसीआई संस्था द्वारा एक जिला समन्वयक और नौ ब्लॉक समन्वयक की नियुक्ति की गई है।

एसीएमओ डॉ एपी सिंह ने बताया कि कार्यक्रम की जनजागरुता के लिए ग्राम-प्रधान, कोटेदार, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं शिक्षकों का सहयोग लिया जाएगा। नोडल अधिकारी डॉ जय गोविन्द ने बताया कि लोग खाली पेट दवा का सेवन नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि 2 साल से कम उम्र के बच्चे, गंभीर रोग से ग्रसित एवं गर्भवती महिला को फाइलेरिया की दवा नहीं खिलाई जाएगी। अभियान के कुशल क्रियान्वयन के लिए आशाओं की टीम बनाई जाएगी। आशाओं के कार्यों के पर्यवेक्षण के लिए डबल्यूएचओ से हर पीएचसी स्तर पर पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाएगी। जिला मलेरिया अधिकारी मंजुला आनंद ने कहा कि अभियान में 2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की एक गोली एवं अलबेंडाजोल की एक गोली, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो गोली एवं अलबेंडाजोल की एक गोली एवं 15 वर्ष से अधिक लोगों को डीईसी की तीन गोली एवं अलबेंडाजोल की एक गोली दी जाएगी। अलबेंडाजोल का सेवन चबाकर किया जाना है।

जिला फाइलेरिया नियंत्रण इकाई की बायोलॉजिस्ट कंचन गुप्ता का कहना है कि फाइलेरिया हाथीपांव रोग के नाम से भी जाना जाता है। बुखार का आना, शरीर पर लाल धब्बे या दाग का होना एवं शरीर के अंगों में सूजन का आना फाइलेरिया की शुरुआती लक्ष्ण होते हैं। यह क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से फैलता है। आमतौर पर इसके लक्षण 5 से 15 वर्षों बाद प्रकट होते हैं। यह संक्रमण लसिका (लिम्फैटिक) प्रणाली को नुकसान पहुँचाता है। फाइलेरिया से जुडी विकलांगता जैसे लिंफोइडिमा (पैरों में सूजन) एवं हाइड्रोसील (अंडकोश की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों को इसके कारण आजीविका एवं काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। पीसीआई के जिला समन्वयक पुनीत तिवारी कहना है कि जिले के सभी स्कूलों में अभियान को लेकर प्रभात फेरी के साथ प्रार्थना सभा में इसके विषय में बच्चों को जागरुक किया जायेगा। जिले में गठित स्वयं सहायता समूहों में जीविका कार्यकर्ता अभियान के दौरान फाइलेरिया दवा के बारे में लोगों को अवगत कराएंगी। साथ ही यह सुनश्चित कराएंगी कि अभियान में दवा का सेवन शत-प्रतिशत हो।

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