Tuesday, February 10, 2026
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Gonda News : सजायाफ्ता कैदी के जेल में भी होते हैं अधिकार!

संवाददाता

गोण्डा। उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण व जनपद न्यायाधीश डॉ. दीपक स्वरूप सक्सेना के निर्देशन में शुक्रवार को जिला कारागार में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन एवं निरीक्षण प्राधिकरण के सचिव कृष्ण प्रताप सिंह द्वारा किया गया। विधिक साक्षरता शिविर में सचिव द्वारा विचाराधीन बन्दियों के शिकायतों के निराकरण के बावत जानकारी देते हुए बताया गया कि जेल में निरुद्ध विचाराधीन बन्दियों के अधिकारों की बात प्रत्येक स्तर पर होती रही है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्तियों ने अपने कई निर्णयों में सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों के अधिकारों के बारे में उल्लेख किया है। विचाराधीन कैदी या फिर सजायाफ्ता कैदी के अधिकार जेल में भी बने रहते है और कानून के हिसाब से ही उनके अधिकारों पर अंकुश लगाया जा सकता है। आपराधिक विधि के अन्तर्गत किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना सकता, जब तक कि न्यायालय आरोपी को दोषी नहीं मानता। जब भी किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई आरोप लगाया जाता है तो वह मात्र आरोपी होता है। ऐसे में उसे यह संवैधानिक अधिकार है कि उसे अपने बचाव का मौका मिले। इस सन्दर्भ में संविधान के अनुच्छेद -22 में मूल अधिकार है कि प्रत्येक आरोपी को बचाव का मौका दिया जाए। इसके तहत अदालत का कर्तव्य है कि जब भी कोई आरोपी अदालत में पेश हो तो वह उससे पूछे कि क्या उसे वकील चाहिए? वकील न होने पर अदालत आरोपी को सरकारी खर्चे से वकील मुहैया कराती है। शिविर में उपस्थित समस्त बन्दियों को कोविड-19 प्रोटोकाल का कड़ाई से अनुपालन करने एवं अनिवार्य रूप से साफ-सफाई व आवश्यक दूरी बनाये रखने हेतु बताया गया। इस दौरान सचिव द्वारा जिला कारागार गोण्डा में स्थापित लीगल एड क्लीनिक का निरीक्षण किया गया तथा उसमें नियुक्त पराविधिक स्वयं सेवकों को बताया गया कि वे कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए लीगल एड क्लीनिक का सुचारू रूप से सचालन करते रहे तथा जरूरतमंद को विधिक सहायता भी उपलब्ध करावे तथा विधिक सहायता से सम्बन्धित अभिलेखों को दुरुस्त रखें। विधिक साक्षरता शिविर में सचिव द्वारा आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत (12.03.2022) में दीवानी लघु दाण्डिक वाद, फौजदारी, राजस्व चकबन्दी बिजली चोरी, 125 गुजारा भत्ता, बैंक वाद, वैवाहिक तथा मोटर दुर्घटना प्रतिकर, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र एवं धारा 138 एन.आई. एक्ट से सम्बन्धित प्रकरणों को सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित कराने हेतु जानकारी प्रदान की गयी। इस अवसर पर जिला कारागार के प्रभारी अधीक्षक दीपांकर भारती तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक मुकेश कुमार वर्मा आदि अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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