Wednesday, February 11, 2026
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Gonda News: शिवाकांत विद्रोही व सतीश आर्य साहित्य भूषण के लिए नामित

जानकी शरण द्विवेदी

गोण्डा। जनपद के प्रतिष्ठित साहित्यकार शिवाकांत मिश्र विद्रोही को प्रदेश सरकार के हिन्दी संस्थान द्वारा गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर ढाई लाख रुपये के साहित्य भूषण पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा पर साहित्यकारों व वुद्धिजीवियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। जनपद के सूचना उपनिदेशक डा. राजेन्द्र यादव ने शनिवार को कवि विद्रोही को सम्मानित करते हुए कहा कि श्री विद्रोही ने ओज के साथ सामयिक विषयों पर राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में नवगीत की रचना कर साहित्य के क्षेत्र में जनपद को एक नई पहचान दी है। इस मौके पर श्री विद्रोही का स्वागत करते हुए मां सरस्वती की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। विद्रोही ने बताया कि उप्र हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष व निदेशक सदाकांत गुप्त द्वारा शुक्रवार को संस्थान द्वारा उन्हें काव्य में ओज व नवगीत में साहित्य सेवा के लिए साहित्य भूषण पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की है। कवि विद्रोही को संस्थान से साहित्य भूषण मिलने पर हिन्दी के लब्ध प्रतिष्ठित कवि सोम ठाकुर (आगरा), डा विष्णु सक्सेना (हाथरस), कमलेश शर्मा (इटावा), बलराम श्रीवास्तव (मैनपुरी), एवं स्थानीय साहित्यकारों में संस्थान से पूर्व में सम्मानित डा सूर्य पाल सिंह, सतीश आर्य, सुरेन्द्र बहादुर सिंह झंझट, डा उमा सिंह , विनय, अक्षत, एस पी मिश्र, चन्दन तिवारी, आरजे शुक्ल यदुराय एवं खरगूपुर के पूर्व चेयरमैन राजीव रस्तोगी, राजेश मोकलपुरी, सुरेश मोकलपुरी, यज्ञराम मिश्र यज्ञेश, यज्ञदेव पाठक नीरज आदि ने प्रसन्नता व्यक्त की है। जनपद के कस्बा खरगूपुर के भगवानदीन पुरवा में पं आद्या प्रसाद मिश्र के पुत्र के रूप में 30 जून 1954 को जन्मे शिवाकांत मिश्र विद्रोही छात्र जीवन से ही काव्य रचना कर रहे हैं। मंच पर ओज व राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में नवगीतकार के साथ आकाशवाणी पर छन्दकार के रूप में लोकप्रिय हैं। स्वास्थ्य विभाग में राजपत्रित पद से सेवानिवृत्त विद्रोही की अब तक चार पुस्तकें ‘किसलय कलश‘, ‘सुगन्ध के हस्ताक्षर’, ‘वीरभद्र’ ओज खंड काव्य व नवगीत संग्रह ‘रोटी है तो दाल नहीं है’ प्रकाशित हो चुकी हैं।

Gonda News: शिवाकांत विद्रोही व सतीश आर्य साहित्य भूषण के लिए नामित
गीतकार सतीश आर्य भी साहित्य भूषण के लिए नामित

जनपद के तहसील मनकापुर निवासी अवधी साहित्य में गीत सम्राट के रूप में विख्यात सतीश आर्य को प्रदेश सरकार के हिन्दी संस्थान द्वारा ढाई लाख रुपये के साहित्य भूषण पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा पर साहित्यकारों ने खुशी जताते हुए बधाई दी है। मनकापुर के ग्राम भिटौरा में 3अक्टूबर 1955 को जन्में गीतकार सतीश आर्य को हिन्दी संस्थान से लगातार दूसरी बार सम्मानित होने का गौरव मिला है। विक्रमशिला विद्यापीठ भागलपुर (बिहार) द्वारा विद्यावाचस्पति एवं विद्यासागर से अलंकृत श्री आर्य डीएवी इंटर कॉलेज, संचार विहार, आईटीआई लिमिटेड, मनकापुर के सेवानिवृत्त शिक्षक अब तक दर्जनों संस्थाओं से सम्मानित हैं और अवध विश्वविद्यालय एवं एनसीआरटी की कक्षा छह में उनकी कविताएं पाठ्यक्रम में भी शामिल है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा एवं पुलिस महानिदेशक डॉ सूर्य कुमार शुक्ला द्वारा ’वागीश्वरी सम्मान’ से अलंकृतद्य हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा ’विद्यावागीश’, गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा ’अमृत कलश’ उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा ऋषिकेश चतुर्वेदी, ब्रजभाषा सम्मान, देश के अन्य अनेक मनीषियों एवं साहित्यकारों द्वारा विभिन्न पुरस्कारों एवं सम्मानों तथा मानद उपाधियों से अलंकृत, नेपाल देश द्वारा ’अवधी साहित्य भूषण’ की उपाधि से सम्मानित हो चुके हैं। उनकी कविताओं का राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं व आकाशवाणी व दूरदर्शन पर प्रकाशन प्रसारण हुआ है। सतीश आर्य की प्रकाशित कृतियों में ’महुआ वृक्ष तले’ गीतसंग्रह, ’दोऊ आँखिन की पुतरी भई हिन्दी’, ’छंद की छाँव’, ‘महुआरी’ संग्रह पाठकों में लोकप्रिय है।

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जानकी शरण द्विवेदी
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