Friday, April 3, 2026
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Gonda News : यूक्रेन संकट के समय एक बार फिर चर्चा में हैं विजय मिश्र!

जानकी शरण द्विवेदी

गोण्डा। रूस और यूक्रेन के युद्ध से पूरी दुनिया मे दहशत है। बहुत सारे भारतीय छात्र भी इसी युद्ध के कारण यूक्रेन में फंसे हुए हैं। उन्हें निकालने के लिए भारत सरकार के साथ ही कुछ नागरिक भी पूरी तरह प्रयास कर रहे हैं। उन्ही लोगों में जिले के परसपुर निवासी विजय मिश्र जो कि लखनऊ में एक प्राइवेट ग्रुप में जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं, वे और उनके कुछ मित्र उक्रेन में फंसे छात्रों को भारत लाने और अन्य सुविधाएं दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। इसमें वह काफी सफल भी हुए हैं।
विजय मिश्र बताते हैं कि उन्होंने इंग्लैंड निवासी अपनी मित्र के साथ मिलकर कोरोना की शुरुआत में कोविड सरवाइवर फोर्स नाम से एक ग्रुप बनाया था। इसमें बाद में हज़ारों की संख्या में लोग जुड़ गए और कोरोना में हमने अनेक लोगों की यथासंभव मदद भी किया। इसी ग्रुप के माध्यम से यूक्रेन में फंसे बहुत से छात्र छात्राओं के परिजनों ने हमसे सम्पर्क किया। इसके बाद मैंने तुरंत विदेश मंत्री एस. जयशंकर और प्रधानमंत्री के सलाहकार अमित खरे को फ़ोन करके उनसे मदद मांगी। उन्होंने तुरंत ही विदेश सचिव हर्ष सिंगला को मदद के लिए कहा। इसके बाद छात्र छात्राओं को मदद पहुंचाई गई। मिश्र ने कहा कि विदेश मंत्री ने व्हाट्स एप सूचना पर भी छात्रों को मदद पहुंचाई है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रही पंजाब की छात्रा अमनजोत का बैग रास्ते में खो गया। उसी बैग में पासपोर्ट भी था। युद्ध के चलते दूतावास से भी संपर्क नहीं हो पा रहा था। छात्रा के परिजनों की सूचना पर सरकार के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों को यह सूचना दिए जाने पर उन्होंने तत्काल विदेश सचिव के माध्यम से यूक्रेन स्थित भारतीय राज दूतावास को सूचना पहुंचाई और अमनजोत को इमरजेंसी सर्टिफिकेट दिया गया। साथ ही उसे सुरक्षित पोलैंड पहुंचाया गया। इसी प्रकार आंध्र प्रदेश निवासी नरेंद्र भूपल के पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचने के बाद उसे पैनिक अटैक आ गया। यूक्रेन पुलिस द्वारा उसे सीमा से अस्पताल ले जाया गया। परन्तु उसके बाद पांच दिन तक उसका कुछ पता नहीं चल पाया और न ही उससे संपर्क हो सका। जैसे ही विजय मिश्र को इसके बारे में जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मदद मांगी। उन्होंने दूतावास के अधिकारियों को नरेंद्र का पता लगाने को कहा। विदेश मंत्री के सहयोग से चार दिन बाद नरेंद्र को ढूंढ निकाला गया। विजय मिश्र के इस सराहनीय काम की चर्चा पूरे क्षेत्र में है। उंन्हांने फिर से अपने क्षेत्र और जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। क्षेत्र के कई लोगों ने विजय मिश्र को उनके इस काम के लिए शुभकामनाएं दिया है।

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जानकी शरण द्विवेदी
सम्पादक
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