कुपोषण की पहचान, चिन्हांकन एवं प्रबंधन हेतु चलाया जा रहा है तीन माह का ‘संभव’ अभियान
गृह भ्रमण कर साफ़-सफाई, पोषणयुक्त आहार, आयरन-फोलिक एसिड गोली के फायदे गिना रहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता
जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, बच्चों और किशोरियों के पोषण स्तर में सुधार हेतु कुपोषण का सही समय से पहचान व प्रबन्धन, पोषण अभियान की एक महत्वपूर्ण रणनीति है। कुपोषण से ग्रसित बच्चों में बाल्यावस्था की बीमारियाँ एवं उनसे होने वाली मृत्यु का खतरा अधिक बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए जिले में एक जुलाई से दो अक्टूबर तक यानी तीन माह का ‘संभव’ अभियान चलाया जा रहा है। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गृह भ्रमण कर लोगों को साफ़ सफाई रखने, आयरन-फोलिक एसिड का सही तरीके से नियमित सेवन करने, स्थानीय खाद्य सामग्रियों से पौष्टिक व्यंजन तैयार करने और और बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाने संबंधी जनजागरुक फैलाने का काम कर रही हैं। साथ ही कार्यकर्ताओं द्वारा समुदाय में कुपोषित बच्चों, किशोरियों एवं महिलाओं की पहचान कर उनका चिन्हांकन एवं प्रबंधन की भी जिम्मेदारी निभाई जा रही है। यह कहना है प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस डीके गौतम का।
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उन्होंने बताया कि लंबे समय से भोजन में पोषक तत्वों के अभाव या संतुलित आहार की कमी से बच्चा कुपोषण का शिकार हो जाता है। उसे जरूरी पोषक तत्व, खनिज और कैलोरी नहीं मिल पाती है। इससे उनका उनके महत्वपूर्ण अंगों का विकास प्रभावित होता है। इसके अलावा बच्चा कई बीमारियों की चपेट में भी आ जाता है। कुपोषण की समस्या सबसे अधिक पांच साल से कम उम्र के बच्चों में होती है। इस उम्र के बच्चों की मौत का एक बड़ा कारण कुपोषण ही होता है। कुपोषण की वजह से बच्चे का विकास रुक जाता है, वह मानसिक रूप से दिव्यांग भी हो सकता है। प्रभारी डीपीओ ने बताया कि संभव अभियान के तहत जुलाई माह में जिले में 5090 बच्चे सैम (अति कुपोषित) व मैम (अल्प कुपोषित) चिन्हित किये गए। उनमें से 1002 बच्चों को कार्यकर्ताओं द्वारा निरंतर गृह भ्रमण, समय-समय पर सही पोषण संदेश व पोषाहार का सही और नियमित सेवन कराकर जुलाई माह में ही कुपोषण से सामान्य की श्रेणी में ले आया गया। इसके अलावा सैम बच्चों को एनआरसी में भर्ती करवाने का भी प्रयास द्वारा किया जा रहा है। ब्लॉक मनकापुर की मुख्य सेविका सुनीता सिंह का कहना है कि वह कार्यकर्ताओं के साथ ब्लॉक के विभिन्न गांवों में घर-घर जाकर लोगों को उनके स्वास्थ्य एवं पोषण देखभाल संबंधी जरूरी जानकारी दे रही हैं और लोगों में जागरुकता फैलाने का काम कर रही हैं। वहीं परसपुर ब्लॉक की मुख्य सेविका तृप्ति पाण्डेय के अनुसार, संभव अभियान के तहत गांवों में लोगों को यह बताया जा रहा है कि हम अपने आसपास साफ-सफाई रखकर भी काफी हद तक कुपोषण से निजात पा सकते हैं। जब हमारे पास-पड़ोस में साफ़ सफाई होगी, तो बच्चे कम बीमार पड़ेंगे और उनका विकास भी नहीं रुकेगा। यही नहीं जब बच्चा नौ माह का हो जाये और एएनएम दीदी टीकाकरण के लिए आएं, तो अपने बच्चे को टीका लगवाने के साथ ही विटामिन ए की खुराक जरुर पिलानी चाहिए। यह बच्चे की आँखों की रोशनी तो बढ़ाती है। साथ ही रतौंधी से भी बचाती है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है। इसके अलावा बच्चे के स्वास्थ्य की जाँच भी समय-समय पर करानी चाहिए, इससे पता चल जाता है कि बच्चा स्वस्थ है या नहीं।
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