जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों तथा उप्र सरकारी कर्मचारी की आचरण नियमावली 1956 में स्पष्ट मनाही के बावजूद कई सरकारी कर्मचारी पार्टी अथवा प्रत्याशी विशेष के पक्ष में खुलकर समर्थन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। परिणाम स्वरूप शिकायत मिलने पर उनके विरुद्ध प्रशासन द्वारा दण्डात्मक कार्रवाई की जा रही है। जिले में अब तक तीन शिक्षकों को निलम्बित किया जा चुका है।
बताते चलें कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अलावा कर्मचारी आचरण नियमावली में भी ऐसा न करने का स्पष्ट प्रावधान है। निर्देश में कहा गया है कि कोई सरकारी कर्मचारी, किसी विधान मण्डल या स्थानीय प्राधिकारी के चुनाव में न तो मतार्थन (मत याचना) करेगा, न अन्यथा उसमें हस्तक्षेप करेगा और न उसके सम्बंध में अपने प्रभाव का प्रयोग करेगा और न उसमें हिस्सा लेगा। निर्देश में यहां तक कहा गया है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने मताधिकार का प्रयोग करने का विचार करता है, तो वह इस बात का कोई संकेत नहीं देगा कि उसने किस ढंग से अपना वोट डालने का विचार किया है अथवा किस ढंग से अपना वोट डाला है। (यहां ढंग से शब्द का आशय पार्टी अथवा प्रत्याशी से है।) इसी प्रकार नियमावली में चुनाव से सम्बंधित बहुत विस्तार से जानकारी दी गई है।

डीएम डा. उज्ज्वल कुमार ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मणपुर विकास खंड कटरा बाजार में तैनात सहायक अध्यापक अनुज यादव द्वारा प्रत्याशी विशेष के पक्ष में सोशल मीडिया पर सरेआम प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। मामले का संज्ञान लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आरपी सिंह को प्रकरण की जांच कराकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। जांच में दोषी पाए जाने पर सहायक अध्यापक अनुज यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया तथा खण्ड शिक्षा अधिकारी बेलसर अजय कुमार त्रिपाठी को मामले की जांच कर आख्या देने के निर्देश दिए हैं। इसी प्रकार विकास खण्ड बेलसर अन्तर्गत कम्पोजिट विद्यालय मेरी उम्मेद में तैनात शिक्षामित्र शिव कुमार शुक्ला द्वारा विधानसभा तरबगंज में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार किए जाने की शिकायत मिली थी। इसकी जांच में पाया गया कि शिकायत सत्य है। इस मामले में संबंधित शिक्षा मित्र की संविदा समाप्त करने की नोटिस दी गई है। जिलाधिकारी ने बताया कि विधानसभा चुनाव पूरी शुचिता व निष्पक्षता से सम्पन्न कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। इसमें किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा किसी दल या प्रत्याशी के प्रति निष्पक्ष होकर कार्य करना है तथा यदि कोई भी कर्मचारी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करेगा तो निश्चित ही उसके विरुद्ध उनके व निर्वाचन आयोग द्वारा सख्त एक्शन लिया जाएगा।

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कलमकारों से अनुरोध..
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जानकी शरण द्विवेदी
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