जांच अधिकारियों ने डीएम को भेजी संयुक्त रिपोर्ट
जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। चकबंदी विभाग के एसीओ के कारण जान गंवाने वाले किसान की मौत उन पर भारी पड़ने वाली है। डीएम के निर्देश पर प्रकरण की जांच करने मौके पर पहुंचे अतिरिक्त उपजिलाधिकारी वीर बहादुर यादव व बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी लाल बहादुर ने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। जानकारी के अनुसार, जांच रिपोर्ट में एसीओ दोषी पाए गए हैं और डीएम मार्कण्डेय शाही की तरफ से चकबंदी आयुक्त को उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए लिखा जा रहा है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से लेकर जिलाधिकारी मार्कण्डेय शाही तक भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टालरेंस’ की नीति अपना रहे हैं। इसके बावजूद अनेक अधिकारियों व कर्मचारियों को उनका स्पष्ट संदेश सुनाई नहीं पड़ रहा है और वे भ्रष्टाचार के उच्चतम स्तर ‘जबराना’ वसूलने में लगे रहते हैं। बता दें कि सरकारी महकमे में
भ्रष्टाचार की तीन श्रेणियां प्रचलित हैं : नजराना, सुकराना और जबराना। नजराना और सुकराना तो सरकारी विभागों में आम चलन में है किन्तु ‘जबराना’ आए दिन किसी न किसी के लिए मुश्किलें खड़ी कर देता है। इसी प्रकार की मुश्किल एसीओ गया प्रसाद वर्मा के लिए भी खड़ी होती दिख रही है। दरअसल धानेपुर थाना क्षेत्र के माधवगंज गांव के रहने वाले किसान संचित की मौत मंगलवार को चकबंदी अधिकारी के न्यायालय पर हो गई थी। डीएम ने प्रकरण की जांच के लिए अतिरिक्त उपजिलाधिकारी वीर बहादुर यादव व एसओसी लाल बहादुर को बुधवार को मौके पर जाकर जांच रिपोर्ट तलब की थी।
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दोनों अधिकारियों के मौके पर जाकर पड़ताल करने पर पता चला कि चकबंदी दफ्तर में तैनात एसीओ गया प्रसाद वर्मा ने संचित की सड़क किनारे की जमीन को जान बूझकर दूसरे व्यक्ति के नाम पर कर दिया। किसी तरह की जांच नहीं की गई और संचित को सीधे नोटिस थमा दिया गया। मृतक किसान संचित जब नोटिस लेकर एसीओ के पास गया तो उन्होंने खतौनी सही करने के बदले दस हजार रुपये की मांग की। रुपये की व्यवस्था न कर पाने के सदमे से मंगलवार को संचित की मौत के गई। अफसरों के गांव पहुंचे की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में गांव के अन्य कई लोग भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने चकबंदी दफ्तर में फैले भ्रष्टाचार की सच्चाई जांच अफसरों को बताई। ग्रामीणों ने बताया कि चकबंदी के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है। चकबंदी दफ्तर जाने वाले किसानों से मनमानी तरीके से वसूली की जा रही है। एसीओ की करतूत व भ्रष्टाचार की सच्चाई सुनकर जांच अफसर दंग रह गए। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया है। जांच अधिकारियों ने डीएम को संयुक्त रिपोर्ट सौंप दी है। बताया जाता है कि डीएम की तरफ से एसीओ के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई के सम्बंध में चकबंदी आयुक्त को पत्र भेजा जा रहा है।
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