Monday, March 23, 2026
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Gonda News: चारों पुरुषार्थ प्रदान करती है श्रीमद भागवत कथा-पं. राधेश्याम शास्त्री

श्री राम जानकी धर्मशाला में जुगल किशोर अग्रवाल की स्मृति में आयोजित कथा का दूसरा दिन

जानकी शरण द्विवेदी

गोण्डा। श्रीमद भागवत कथा श्रवण करने से न केवल धुंधकारी जैसे महाप्रेत का उद्धार हो जाता है, बल्कि व्यक्ति को हिन्दू शास्त्रों में वर्णित चारों प्रकार के पुरुषार्थों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। यह बात वृन्दावन धाम के ख्यातिलब्ध कथाकार पंडित राधेश्याम शास्त्री ने स्व. जुगल किशोर अग्रवाल की पावन स्मृति में रानी बाजार स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में चल रही सात दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिन श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का पुत्र लायक निकलता है, वह अपने कुल का नाम रोशन करता है किन्तु यदि कोई कन्या लायक निकलती है, तो वह अपने मायके और ससुराल दोनों कुलों का नाम रोशन करती है। श्रीराम चरित मानस को उद्यृत करते हुए व्यास पीठ ने कहा कि भगवान श्रीराम के वन गमन की सूचना पाकर जब महाराजा जनक उनसे मिलने के लिए चित्रकूट पहुंचते हैं तो अपनी पुत्री सीता को बल्कल वस्त्रों में राम के साथ देखकर भाव विहवल हो जाते हैं। वह बोल उठते हैं कि बेटी! अपनी इस मर्यादा से तुमने दोनों कुलां का नाम पावन कर दिया। युधिष्ठिर चरित्र की व्याख्या करते हुए शास्त्री जी ने कहा कि वह किसी से द्वेष नहीं करते थे। यहां तक कि वह रोजाना धृतराष्ट्र और गांधारी के भी पैर छूते थे। उन्होंने कहा कि सभी माता-पिता को अपने बच्चों को यह संस्कार जरूर देना चाहिए कि वे अपने से बड़़ों का पैर अवश्य छुएं। यदि अपने जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हो तो बच्चों को विनम्र बनाओ। पहले लोग अपने जीवन के उत्तरार्द्ध में भजन करने के लिए तीर्थ स्थल या एकांत में इसलिए चले जाया करते थे, क्योंकि वहां का वातावरण हरि भजन में मदद करता है। यहां तक कि विदुर के समझाने पर धृतराष्ट्र भी सपत्नीक भगवद भजन के लिए हरिद्वार चले गए थे। उन्होंने कहा कि हमें एक बात कभी नहीं भूलनी चाहिए कि मानव जीवन में जो भी कुछ हो रहा है, सब ईश्वर कर रहा है। मानव निमित्त मात्र है। यह बात अर्जुन ने युधिष्ठिर से उस समय कही है, जब वह द्वारका पुरी से कृष्ण की पत्नियों को लेकर वापस इन्द्रप्रस्थ लौट रहे थे और रास्ते में उन्हें कोलभीलों ने लूट लिया था।

Gonda News: चारों पुरुषार्थ प्रदान करती है श्रीमद भागवत कथा-पं. राधेश्याम शास्त्री
यहां होता है कलियुग का वास

व्यास पीठ ने कहा कि कृष्ण के गोलोक वासी होने के बाद युधिष्ठिर को जब कलियुग के आने का आभास हो गया तो वह परीक्षित को सत्ता सौंपकर चारों भाइयों व द्रोपदी को साथ लेकर सत्य की खोज में निकल पड़े। वह बद्रीनाथ पहुंचे। सरस्वती नदी के आगे स्वर्ग के लिए सीढ़ी बनाई और सभी का स्वर्गारोहण हो गया। उन्होंने कहा कि द्रोपदी पतिब्रता नारी थी। तमाम लोग इस पर सवाल खड़ा कर सकते हैं कि पांच पति होने के बावजूद द्रोपदी पतिब्रता कैसे हो सकती है। उन्होंने कहा कि द्रोपदी कोई सामान्य नारी नहीं थी। वह महाभारत के लिए हवन कुण्ड से प्रकट हुई थी। इधर परीक्षित की पत्नी इरा से उन्हें चार पुत्र प्राप्त हुए। तीन अश्वमेघ यज्ञ करने के बाद वह दिग्विजय पर निकल पड़े। रास्ते में उन्होंने बैल रूपी धर्म और गाय रूपी पृथ्वी को दुखी देखा। उन्होंने इसके बारे में मनन किया किन्तु कुछ स्पष्ट पता नहीं चल सका क्यांकि सुख और दुख का स्पष्ट कारण कोई भी बता नहीं सकता है। विचार किया कि यह कलियुग के प्रभाव से है। उन्होंने कलियुग को बुलाकर निर्देश दिया कि तुम मेरे राज्य से निकल जाओ। कलियुग ने कहा कि महाराज सूर्य उदय से अस्त तक आपका राज्य है। मैं रहने के लिए कहां जाऊं। मुझे कोई तो ठिकाना दे दो। इस पर युधिष्ठिर ने उसे जुआ खेले जाने वाली जगह, मदिरालय, वेश्यालय और बूचड़खाना में रहने की अनुमति दे दी। बाद में वह अपने बड़े परिवार का हवाला देकर पांचवां स्थान स्वर्ण (धन) में मांग लिया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति इन चीजों से दूर रहे तो उस पर कलियुग का प्रभाव कम हो सकता है। अन्याय से कमाया हुआ धन जब आता है तो कलियुग खोपड़ी में बैठ जाता है, जैसे जरासंघ को जीतकर लाया गया स्वर्ण मुकुट पहनने पर राजा परीक्षित के खोपड़ी पर कलियुग बैठ गया था और आखेट के लिए जाने पर जंगल में भगवद् भजन में लीन शमीक ऋषि के गले में अनायास मरा सर्प डाल दिया था। इसे देख उनके बेटे ऋंगी ऋषि ने यह श्राप दे दिया था कि जिस सर्प को तूने मेरे पिता के गले में डानकर उनका अपमान किया है, उसी के काटने से आज के सातवें दिन तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। घर लौटने पर राजा ने जब मुकुट उतारा तो उन्हें अपनी गलती का आभास हुआ। वह इसका पाश्चाताप करने तथा मोक्ष की प्राप्ति के लिए राज्य, परिवार छोड़कर गंगा के किनारे शुक्रताल पहुंच गए। वहीं पर श्री शुकदेव जी से भागवत की कथा सुनी और अंत में मोक्ष को प्राप्त किया।

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कथा के आयोजक अनुपम अग्रवाल ने बताया कि रोजाना तीन बजे से इस कथा का दिशा टीवी, यू-ट्यूब, फेसबुक पेज पर भी सीधे प्रसारण भी होता है। इस मौके पर स्व. अग्रवाल की धर्मपत्नी श्रीमती सरोज अग्रवाल, उनकी पुत्रबधू रश्मि अग्रवाल, अनिल मित्तल, राजेन्द्र प्रसाद गाडिया, केके श्रीवास्तव, राजा बाबू गुप्ता, डा. एचडी अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल पिण्टू, संजय अग्रवाल, विक्रम जी, कृष्णा गोयल, अतुल अग्रवाल, संदीप अग्रवाल, रेनू अग्रवाल, अंशू अग्रवाल, अर्पिता अग्रवाल समेत सैकड़ो श्रद्धालु मौजूद रहे।

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जानकी शरण द्विवेदी
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