क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी ने बताया तरीका
जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ शिवाजी ने बताया कि इन दिनों उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में डेंगू का प्रकोप है। कोरोना के साथ ही डेंगू की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। ऐसे में डेंगू और वायरल बुखार के सैकड़ों मरीज अस्पताल में भर्ती है। इसी क्रम में योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने बताया कि डेंगू के बढ़ते मामलों में आयुष विभाग ने इलाज के लिए प्राकृतिक चिकित्सा और योग को अपनाने की सलाह दी है। योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने बताया योग और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से भी डेंगू का इलाज संभव है। डेंगू होने पर घबराने की आवश्यकता नहीं है। यही नहीं प्रत्येक रोगी को अस्पताल में भर्ती ही नहीं होना पड़ता है।बल्कि रोगी घर पर रहते हुए भी उपचार कर सकता है। डेंगू बुखार होने पर शरीर का तापमान अधिक बढ़ जाता है व शरीर में प्लेटलेट्स की मात्रा तेजी से घटने लगती है। ऐसे में जरूरी है कि तापमान को सामान्य बनाए रखें और प्लेटलेट्स को बढ़ाने के लिए ऐसे करें इलाज-आयुष विभाग के मुताबिक डेंगू के रोगी को व्रत रखने से लाभ होता है। इस दौरान सिर्फ लिक्विड डाइट या फलों का सेवन करना लाभदायक होता है। इस दौरान सिर्फ पानी का सहारा न लें बल्कि जूस और नारियल पानी का नियमित सेवन करते रहें। इसके अलावा हल्का या सुपाच्य भोजन भी खाया जा सकता है। इसके साथ ही साथ रोगी द्वारा नींबू और शहद का पानी, गेहूं के घास का जूस और गिलोय का अरक व पपीते के पत्ते के रस का सेवन करके शरीर में प्लेटलेट्स की मात्रा को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। योगाचार्य ने बताया कि डेंगू के बुखार में बर्फ की सिकाई करना लाभदायक है। बर्फ के पैकेट को मरीज के माथे और पेट पर रखना चाहिए। कुछ समय पेट और माथे की सिकाई करें। हर दो घंटे में ऐसा करते रहें जब तक कि शरीर का तापमान सामान्य न हो जाए। अंत में योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने बताया कि अनुलोम विलोम व कपालभाति प्राणायाम करने से होगा विशेष लाभ ऐसे में डेंगू के मरीज को नाड़ी शुद्धि प्राणायाम या अनुलोम विलोम प्राणायाम,चंद्र-भेदी प्राणायाम,भ्रामरी प्राणायाम या शीतली प्राणायाम का नियमित अभ्यास करना चाहिए। इसके साथ-साथ कपालभाति प्राणायाम के नियमित अभ्यास करने से शरीर में आर बी सी, डब्ल्यू बी सी,और प्लेटलेट्स की मात्रा में वृद्धि होती है। इससे मरीज की सेहत में सुधार होता है। दिन में दो से नौ बार तक इसे करना होता है। इसके अलावा औषधियों द्वारा उपचार करना भी फायदेमंद हो सकता है। लेकिन औषधियों का सेवन डॉक्टर के सलाह पर ही करें।
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जानकी शरण द्विवेदी
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