Tuesday, March 3, 2026
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Gonda News : घर-घर खिलाई जाएगी पेट के कीड़े मारने की दवा

सोलह लाख बच्चों को सात अक्टूबर तक खिलाई जाएगी एल्बेण्डाजाल

जानकी शरण द्विवेदी

गोण्डा। जिले के बच्चों को आशा, आगंनबाड़ी कार्यकर्ता आज से घर-घर जाकर पेट के कीड़े मारने की दवा एल्बेण्डाजाल खिलाएंगी। यह अभियान आगामी सात अक्टूबर तक चलेगा। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग संयुक्त रूप से प्रयासरत हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आरबीएसके व आरकेएसके के नोडल डॉ मलिक आलमगीर ने सोमवार को बताया कि उत्तर प्रदेश के 45 जिलों में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान सोमवार से शुरू हुआ है। यह अभियान सात अक्टूबर तक चलेगा। उन्होने बताया कि कोरोना महामारी के कारण आगंनबाड़ी केंद्र और स्कूल आदि बंद चल रहे हैं। इसलिए इस बार आशा और आगंनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से एक वर्ष से 19 तक बच्चों को एल्बेण्डाजाल की दवा घर-घर जाकर खिलाई जाएगी। किसी भी अभिभावक को यह टेबलेट रखने या बाद में खिलाने के लिए नहीं देनी है। यह दवा आशा या आगंनबाड़ी के सामने ही बच्चों को खिलानी है। डॉ मलिक ने बताया कि कोविड 19 के संक्रमण के चलते सभी फ्रंट लाइन कार्यकर्ताओं को खास प्रोटोकाल का पालन करने के निर्देश दिये गए हैं। अभियान में लगे सभी स्वास्थ्य कर्मी मास्क के साथ शारीरिक दूरी का पालन करते हुये बच्चों को दवा खिलाएंगे। उन्होंने बताया कि ज्यादा छोटे बच्चों को टेबलेट चूरा बनाकर पानी के साथ खिलाया जाएगा। बड़े बच्चों को भी दवा चबा-चबाकर ही खानी है। डीसीपीएम डॉ आरपी सिंह ने बताया कि किसी भी तरह की बीमारी होने पर बच्चे को एल्बेण्डा जाल टेबलेट नहीं खिलानी है। यदि किसी भी तरह उल्टी या मिचली महसूस होती है, तो घबराने की जरूरत नहीं। पेट में कीड़े ज्यादा होने पर दवा खाने के बाद सरदर्द, उल्टी, मिचली, थकान होना या चक्कर आना, महसूस होना एक सामान्य प्रक्रिया है। दवा खाने के थोड़ी देर बाद सब सही हो जाता है। इसके अलावा फिर भी किसी अन्य तरह की बड़ी परेशानी हो, तो मुफ्त एंबुलेंस सेवा के टोल फ्री नंबर 108 से मदद ले सकते हैं। वहीं आरकेएसके के जिला समन्वयक रंजीत सिंह ने बताया कि पेट में कृमि होने से शरीर में कई नुकसान पहुंचता है जैसे खून की कमी, कुपोषण, भूख न लगना, कमजोरी, पेट में दर्द, उल्टी-दस्त होना जैसी शिकायतें सामने आती हैं। इन बीमारियों से बचाव के लिए ही कृमिनाशक की गोली खिलाई जाती है।

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