प्रदीप शुक्ल
गोण्डा। जिले की सभी ब्लॉकों में संचालित आश्रय केंद्र की अब्यवस्थाओं को लेकर अब राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संघठन ने हुंकार भर दी है। कहा जाता है कि जिले के कई ग्राम पंचायतों में संचालित आश्रय केंद्र केवल कागजी बने हुए हैं। आये दिन अब्यवस्थाओं की खबरें समाचार पत्रों में पढ़ने को मिल रही हैं। ऐसे में न तो की आश्रय केंद्र में रह रहे पशुओं की देखभाल हो पा रही है और न ही किसानों को छुट्टा पशुओं से होने वाला फसली नुकसान रुक पा रहा है। नतीजा यह है कि करोड़ों खर्च के बाद भी छुट्टा पशुओं की समस्या जस की तस है। आज भी सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में पशुओं का तांडव देखने को मिल रहा है। पंचायती राज ग्राम प्रधान संघठन के जिलाध्यक्ष उमापति त्रिपाठी ने मुख्य विकास अधिकारी से मिल कर ग्राम प्रधानों द्वारा आश्रय केंद्र संचालन में आ रही बाधाओं से अवगत कराया है। उन्होंने अपने मांग पत्र में लिखा है प्रसाशन ग्राम प्रधानों को चारे भूसे के लिए पर्याप्त बजट समय से उपलब्ध नही कराया जा रहा है, जिसके चलते आश्रय केंद्र का सुचारू रूप से संचालन में बाधा आ रही है। उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा है कि या तो संचालन की ब्यवस्था संस्थाओं को दी जाय या समय से पर्याप्त बजट ग्राम प्रधान को उपलब्ध कराया जाय। इस सम्बन्ध में मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी ने संगठन के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया है कि पत्र में दिए सुझावों पर विचार कर समुचित कार्रवाई की जाएगी।
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