Wednesday, April 1, 2026
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Gonda News : आठ ब्लॉकों के 51 गांवों में आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों ने लगायी ‘ग्राम चौपाल’

प्रारंभिक बचपन के अनुभव ही बच्चे के भविष्य का करते हैं निर्धारण : डीपीओ

जानकी शरण द्विवेदी

गोण्डा। समेकित बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग (आईसीडीएस) की ओर से जिले के आठ ब्लॉकों के 51 गांवों में आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों द्वारा ‘ग्राम चौपाल’ का आयोजन किया गया। इसमें गांव के तीन से छः साल तक के बच्चे, अभिभावक तथा पंच और ग्राम प्रधान ने प्रतिभाग किया। इस दौरान विभिन्न खेलों के माध्यम से बताया गया कि यदि अभिभावक बच्चों के प्रति जागरुक होंगे, तो बच्चे 3 से 6 साल की उम्र में खेल-खेल में शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनेंगे, जो उनके सुनहरे भविष्य में सहायक सिद्ध होगा। झंझरी ब्लॉक के नेवलगंज परेड सरकार में आयोजित ग्राम चौपाल को संबोधित करते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि बचपन के शुरुआती क्षण महत्वपूर्ण होते हैं और उनका असर जीवन भर रहता है। शिशु के मस्तिष्क का विकास गर्भावस्था के समय ही शुरू हो जाता है और गर्भवती माता के स्वास्थ्य, खान-पान और वातावरण का उस पर प्रभाव पड़ता है। जन्म के बाद, शिशु का मस्तिष्क तेज़ी से विकसित होता है और उसका शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक स्वास्थ्य, सीखने की क्षमता और व्यस्क होने पर उसकी कमाने की क्षमता और सफलता को भी प्रभावित करता है। सबसे शुरुआती वर्ष (0 से 6 वर्ष) बच्चे के विकास के सबसे असाधारण वर्ष होते हैं। जीवन में सब कुछ सीखने की क्षमता इन्ही वर्षों पर निर्भर करती है। इस नींव को ठीक से तैयार करने के कई फायदे हैं, जैसे स्कूल में बेहतर शिक्षा प्राप्त करना और उच्च शिक्षा की प्राप्ति, जिससे समाज को महत्त्वपूर्ण सामाजिक तथा आर्थिक लाभ मिलते हैं। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ के सहयोग से विक्रमशिला एजूकेशन रिसोर्स सोसाइटी द्वारा प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) पर जिले में 2018 से कार्य किया जा रहा है। यूनिसेफ संस्था के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सोमवार 13 दिसंबर को 8 ब्लॉकों के 51 गांवों में एक साथ ग्राम चौपाल का आयोजन आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के द्वारा किया गया। सीडीपीओ डीके गौतम ने कहा कि स्वस्थ प्रारंभिक बाल विकास हर बच्चे के लिए महत्त्वपूर्ण है। प्रारंभिक बचपन के अलग-अलग चरण हैं जैसे गर्भधारण से जन्म, जन्म से 3 वर्ष, जिसमें शुरुआती 1000 दिनों (गर्भधारण से 24 महीने) पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके बाद आते हैं प्री-स्कूल और प्री-प्राइमरी वर्ष (3 वर्ष से 5-6 वर्ष, या स्कूल में दाखिले की उम्र)। किसी बच्चे के उत्तम विकास के लिए पोषण एवं स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा तथा प्रेरणा ज़रूरी तत्त्व हैं, जो एक साथ मिल कर ’भरपूर देख भाल’ कहलाते हैं।

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अभिभावकों ने जताई ख़ुशी :

अभिभावक नीतू सिंह व लीलावती ने कहा कि ग्राम प्रधान अनन्त प्रकाश शुक्ला और आंगनवाड़ी आशा सिंह के प्रयास से लगे इस चौपाल में हमनें खेल-खेल में बच्चों को अक्षरों का ज्ञान, रंगों की पहचान कराने का बढ़िया तरीका सीखा द्य वहीं अभिभावक चांदनी और मनीषा ने कहा कि चौपाल में हमें बच्चों के देखभाल, खानपान और सही विकास के बारे में अच्छी जानकारी मिली। गौरतलब हो कि ईसीसीई के तहत जिले के 60 आंगनवाड़ी केंद्र मॉडल केंद्र के रूप में विकसित किये गए हैं। इन केन्द्रों पर वच्चो के स्कूल पूर्व शिक्षा को लेकर पठन-पाठन एवं खेल सामग्री उपलब्ध कराए गए हैं तथा प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा की बेहतरी को लेकर आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। स्कूल पूर्व शिक्षा को लेकर गांव के अभिभावकों में जागरुकता लाने हेतु आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों को चौपाल किट बैग यूनिसेफ के सहयोग से उपलब्ध कराया गया है। ग्राम चौपाल हेतु जिले के 6 बाल विकास परियोजना अधिकारियों, 21 मुख्य सेविकाओं व चयनित सक्रिय 185 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को ईसीसीई विषय पर मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण भी दिया चुका है तथा शीघ्र ही शेष परियोजनाओं का पर प्रशिक्षण का कार्य पूरा किया जाएगा।

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जानकी शरण द्विवेदी
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