जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ शिवाजी के निर्देशन में ग्राम भौंरूपुर में तीन दिवसीय योग शिविर का आयोजन किया गया। शिविर के प्रथम दिवस को योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने विश्व आर्थराइटिस दिवस के रूप में ग्रामवासियों के साथ मनाया। विश्व आर्थराइटिस दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों में जोड़ों व हड्डियों के दर्द के प्रति जागरुकता फैलाना है। पहले इस रोग की समस्या ज्यादातर बड़ी उम्र के लोगों को होती थी, लेकिन अब इस बीमारी की चपेट में युवा वर्ग भी आ गया है। आर्थराइटिस का मतलब गठिया होता है, जो कि जोड़ों की सूजन व दर्द से जुड़ा रोग है। यह रोग आम तौर पर ओस्टियो आर्थराइटिस और रुमेटॉयड आर्थराइटिस के रूप में होता है। बढ़ती उम्र के साथ रोग की आशंका भी बढ़ती जाती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस रोग की चपेट में ज्यादा आती हैं।
इसी क्रम में योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने विश्व आर्थराइटिस दिवस के अवसर पर बताया कि आर्थराइटिस अर्थात् गठिया आज की बदलती जीवन शैली, मोटापा, गलत खानपान आदि वजहों से बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। आर्थराइटिस का सबसे अधिक प्रभाव घुटनों में और उसके बाद कुल्हे की हड्डियों पर पड़ता है। इससे बदन में दर्द और अकड़न महसूस होने लगती है। कभी-कभी हाथों, कंधों और घुटने में सूजन और दर्द बना रहता है और हाथ हिलाने में भी तकलीफ होती है। ऐसे लोगों को आर्थराइटिस की समस्या हो सकती है। योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने बताया कि गठिया के प्रमुख कारणों में मोटापा सबसे ऊपर है। शरीर पर सामान्य से अधिक वजन जोड़ों में सूजन पैदा करता है। आर्थराइटिस जोड़ों की सूजन है। सौ से अधिक प्रकार के गठिया से लोग परेशान पाये जा रहे हैं। सामान्य स्थिति में आस्टियो आर्थराइटिस 50 साल की उम्र के बाद होता है। यह शरीर पर निर्भर करता है कि जोड़ों को कितना और किस तरह से इस्तेमाल किया गया है। आर्थराइटिस के लक्षण आम तौर पर बढ़ती उम्र के साथ विकसित होते हैं, लेकिन ये अचानक भी समस्या बन सकते हैं। इसके अलावा गलत तरीके से अधिक देर तक झुककर काम करना, सिर पर नियमित तौर पर वजन उठाना, झुककर कोई वजन उठाना, कंप्यूटर के सामने गलत तरीके से घंटों बैठे रहना, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करना, गर्दन झुकाकर घंटों काम करते रहने से भी गठिया की शिकायत हो सकती है।
योगाचार्य ने बताया कि इसके अलावा रुमेटोइड आर्थराइटिस में मरीज के शरीर के अंग अकड़ जाते हैं। इसी तरह यूरिक एसिड बढ़ने से भी गठिया (गाउट) की समस्या होती है। योगाचार्य ने बताया कि योगिक क्रियाओं में संधि संचालन, उदर संचालन, शवासन (10 मिनट), वज्रासन (अगर कर सके), कोणआसन, त्रिकोणासन, गोमुखासन, भुजंगासन, अर्द्धमत्स्येंद्र आसन, धनुरासन, सर्वांगासन, अंत में शवासन के माध्यम से हम गठिया की समस्या में आराम पा सकते हैं। इसी क्रम में डॉ शिवाजी ने बताया कि दूध से बनी चीजों, जंक फूड तथा मैदे आदि से बनी चीजों का सेवन न करें, प्रतिदिन संतुलित आहार लें। धूम्रपान और शराब का सेवन न करें, यह हड्डियों को कमजोर बनाता है, रोजाना सैर करें और किसी भी योगिक क्रिया में यदि कोई परेशानी हो तो उसे करने से बचें। शिविर में ग्रामवासी राज कुमार शुक्ला, शिवम शुक्ला, आदर्श गुप्ता, नीरज शुक्ला, सिद्धार्थ मिश्रा, कैलाश नाथ, अखिलेश, मोनू, मनोज आदि कई योग साधक एवं अन्य ग्रामीणजन मौजूद रहे।
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जानकी शरण द्विवेदी
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