योग्य दम्पतियों को परिवार नियोजन के साधन अपनाने के लिए किया गया प्रेरित
जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। गर्भनिरोधक उपायों के प्रति जागरूकता लाने और युवाओं को सही उम्र में प्रजनन का निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए शनिवार को स्वास्थ्य इकाईयों पर खुशहाल परिवार दिवस मनाया गया। इसी क्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वजीरगंज में स्टाल लगाकर गर्भ निरोधक संसाधनों के बारे में योग्य दम्पतियों को जागरूक किया गया और परिवार नियोजन के साधन वितरित किये गए। इस मौके पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ मलिक आलमगीर ने कहा कि हमारे संसाधन सीमित हैं, ऐसे में आबादी को भी सीमित रखना बहुत ही जरूरी है। दो बच्चों के जन्म के बीच कम से कम तीन साल का अंतर रखना चाहिए ताकि महिला का शरीर पूरी तरह से दूसरे गर्भधारण के लिए तैयार हो सके। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी व्यापक सुधार लायी जा सकती है। इसके अलावा उन्होंने नव दम्पतियों को शादी के दो साल बाद ही बच्चे के बारे में सोचने के प्रति जागरूक करने की बात कही, क्योंकि पहले जरूरी है कि पति-पत्नी एक-दूसरे को अच्छी तरह से समझें, परिवार को समझें और अपने को आर्थिक रूप से इस काबिल बना लें कि अच्छी तरह से बच्चे का लालन-पालन कर सकें, तभी बच्चा पैदा करने की योजना बनाएं। साथ ही कहा कि पुरुषों को परिवार नियोजन के साधन अपनाने के लिए स्वयं पहल करनी चाहिए। अधिक बच्चों को पैदा करना मर्दानगी की निशानी नहीं है इससे परिवार और समाज पर आर्थिक तंगी का अधिक प्रभाव पड़ता है।
गौरतलब है कि परिवार नियोजन के प्रति जागरुकता दिखाते हुए वर्ष 2018-19 में 2433 महिलाओं ने तथा 5 पुरुषों ने नसबंदी सेवा अपनाकर परिवार नियोजन के प्रति जिम्मेदारी दिखाई। इसके अलावा वर्ष 2019-20 में 3 पुरुषों ने नसबंदी करवाई द्य वहीं इस वर्ष एक अप्रैल से 31 अक्टूबर तक 273 महिला नसबन्दी व दो पुरुष नसबन्दी किया गया। वहीं सीएचसी वजीरगंज अधीक्षक डॉ आशुतोष शुक्ला ने कहा कि उन समुदायों में, जहां निर्धन लोगों को समान अवसर नहीं मिलते हैं या उन्हें डर रहता है कि जमीन, संसाधनों, स्वास्थ्य सेवाओं व सामाजिक लाभों के आभाव में वे और उनके बच्चे जिंदा नहीं रह सकेंगे, वे अधिक बच्चों की चाहत रखते हैं। साथ ही कहा कि लड़का पैदा करने के लिए पारिवारिक दबाव के कारण अनके महिलाओं को बार-बार गर्भधारण करने पर मजबूर होना पड़ता है। योग्य दम्पतियों को जागरुक करते हुए उन्होंने कहा कि अगर बच्चों की संख्या और उनके पैदा होने के समय पर नियंत्रण है, तो महिला अधिक स्वस्थ रहेगी। फिर भी, यह निर्णय लेना कि वह परिवार नियोजन का प्रयोग करना चाहती है कि नहीं, उसका अधिकार होना चाहिए क्योंकि उसके शरीर को ही गर्भ का बोझ व बच्चों को पालने दृपोसने की जिम्मेदारी सहन करनी पड़ती है।
सीएचसी वजीरगंज में तैनात एचईओ एसबी वर्मा ने बताया कि कुछ पुरुष नहीं चाहते हैं कि उनकी पत्नियां परिवार नियोजन के साधनों का प्रयोग करें, क्योंकि उन्हें विभिन्न साधनों के कार्य करने के बारे में अधिक जानकारी नहीं होती है। साथ ही यह भी बताया कि आज इस दिवस के अवसर पर सीएचसी पर त्रैमासिक गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा का एक डोज, 8 साप्ताहिक गर्भनिरोधक गोली छाया, 5 ईसीपी और 124 कंडोम का वितरण किया गया। इस दौरान काफी संख्या में लाभार्थी मौजूद रहे।
लाभार्थियों को परिवार कल्याण कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए एचईओ एसबी वर्मा ने बताया कि प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में परिवार नियोजन की महती भूमिका है। इसी के साथ इसमें लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है, जो इस प्रकार है-नसबंदी कराने वाले परूषों और महिलाओं को क्रमशः 3000 और 2000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा पोस्ट पार्टम स्टर्लाईजेशन (प्रसव के तुरंत बाद नसबंदी) कराने वाली महिलाओं को 3000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, जबकि अस्थायी विधियों में प्रसव पश्चात आईयूसीडी एवं गर्भपात (स्वतः व सर्जिकल) उपरांत आईयूसीडी, जिसको सरल भाषा में कॉपर-टी कहा जाता है, के लिए लाभार्थी को 300 (2 फ़ॉलो अप पर), अंतरा इंजेक्शन लगवाने पर 100 रुपये प्रति डोज की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
डिस्ट्रिक्ट फेमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक मैनेजर सलाहुद्दीन लारी ने बताया कि नसबंदी फेल होने पर दंपति को परिवार नियोजन इंडेमिनिटी योजना के तहत 60 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है। इसके अलावा नसबंदी के बाद अस्पताल या घर में सात दिन के अंदर लाभार्थी की मृत्यु होने पर आश्रित को चार लाख रुपये तथा 8 से 30 दिन के भीतर मृत्यु हो जाने पर दो लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान किये जाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि बढ़ती हुयी आबादी पर अंकुश लगाने और समुदाय के प्रजनन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य आंकड़ों को बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
