जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस पर बच्चों, युवाओं व बुजुर्गों से भी योगाभ्यास की शुरुआत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नियमित सूक्ष्म यौगिक क्रियायें करने से हमारा शरीर स्वस्थ व बलवान होगा। जोड़ों के दर्द से आराम के लिए उन्होंने बताया कि हाथ-पैर, गर्दन, कंधे आदि को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे, आगे-पीछे और गोल घुमाएं। जोड़ों में अकडऩ दूर होगी साथ ही दर्द भी कम होगा। आप सेहतमंद हैं,तो कुछ व्यायाम दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। लेकिन किसी रोग से पीड़ित हैं, तो बिना विशेषज्ञ की सलाह से योग न करें। जमीन पर सीधा लेट जाएं। शरीर को ढीला छोड़ें। कुछ देर इसी अवस्था में बने रहें। नियमित प्राणायाम का अभ्यास करें। गहरी सांस लेकर छोडऩी की प्रक्रिया अवश्य करें। तनाव और थकान दूर होते हैं। शरीर के हर अंग को कुछ समय के लिए आराम मिलता है। झटके से लेटने या उठने से बचें। कमजोर हड्डियां हैं, तो क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने कहा हास्य योग बुजुर्गों को देता है। एनर्जी(ऊर्जा) घर, मैदान या खुली जगह पर खुलकर हंसने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। कोशिकाएं रिलैक्स होने लगती हैं। जिससे व्यक्ति मानसिक रूप से अच्छा महसूस करता है। योगाचार्य ने अंत में कहा कि नियमित लाफ्टर थैरेपी से मानसिक सेहत बरकरार रहती है और इसके लिए घर और आसपास का माहौल सकारात्मक होना चाहिए।
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इसी क्रम में देवीपाटन परिक्षेत्र के आईजी डॉ राकेश सिंह सभी को योग दिवस में योग के लिए आहवान किया और खुद सभी के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘योग एट होम एंड योग विथ फेमिली‘ का ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों के माध्यम से सभी के साथ मिलकर लोगों को योग के प्रति जागरूक करने की एक अद्भुत और अतुलनीय पहल की है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए योग अत्यंत महत्वपूर्ण है। योग के प्रति लोगों की रुचि और जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। योग प्रशिक्षक आदित्य प्रताप सिंह ने कहा कि युवा अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में थोड़ा समय योग के लिए निकालेंगे तो वे पूरी तरह फिट और एक्टिव रह सकते हैं। पढ़ाई और नौकरी करने वाले युवा रोजाना 15 से 20 मिनट योग करें तो ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ेगी और शरीर मजबूत होगा। इससे वे अपने काम को भी बेहतर ढंग से कर सकते हैं। योग प्रशिक्षक आदित्य प्रताप सिंह ने कहा योग के माध्यम से युवाजन अपने शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं अपने मानसिक विकास के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास कर सकते हैं। योग प्रशिक्षक आशीष गुप्ता’ ने कहा सभी माता पिता अपने बच्चों को हमेशा सबसे अच्छा देना चाहते हैं चाहे वह स्वास्थ्य, शिक्षा या अन्य कोई आम वस्तु हो जब बच्चा जन्म लेता है उस क्षण से ही माता-पिता उसके जीवन को बेहतर बनाने के बारे में विचार करना शुरू कर देते हैं। अधिकांश माता-पिता निश्चित रूप से यह जानते हैं कि एक स्वस्थ बच्चा खेलकूद और शिक्षा आदि में हमेशा आगे रहता है। अतः बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना बहुत आवश्यक है।
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योग प्रशिक्षक ने बताया कि वयस्कों का योग करना सामान्य हो गया है। हर दिन बढ़ते शारीरिक और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए योग बेहद जरूरी हो चला है। लेकिन अब बच्चों के लिए भी योग बेहद जरूरी बताया जा रहा है, क्योंकि स्कूलों और कॉलेजों में बढ़ती प्रतिस्पर्धाओं के साथ-साथ बच्चों को तमाम तरह की अतिरिक्त गतिविधियों में हिस्सा लेना होता है। साथ ही बच्चों को अपने माता-पिता और शिक्षकों की अपेक्षाओं को भी पूरा करना होता है। ऐसे में एक बच्चे के शरीर पर मानसिक और शारीरिक तनाव के साथ-साथ कई तरह का दबाव होता है। ऐसे में बच्चों के शरीर के लिए भी योग उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना एक वयस्क के लिए। योग करने की अच्छी आदत बच्चों को बचपन से ही दे दी जाए तो बात ही कुछ और होगी, क्योंकि इसके अनेक फायदे हैं। योग हमारे शरीर को ’शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक’ और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है। इसीलिए योग को आम व्यायाम से ज्यादा तरजीह दी गई है। योग के दौरान बनाई गईं मुद्राएं और आसन बच्चों के संपूर्ण विकास में भागीदार बनते हैं। मस्तिष्क से लेकर पैर तक और सांस लेने से लेकर आंखों की रोशनी तक के लिए योग फायदेमंद है।
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जानकी शरण द्विवेदी
सम्पादक
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