मासिक धर्म के समय सेनेटरी पैड्स का करें इस्तेमाल
इससे जुड़ी कोई समस्या हो, तो डॉक्टर की सलाह लेने में न करें देरी
(मासिक धर्म स्वच्छता दिवस 28 मई पर विशेष)
जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। मासिक धर्म कोई अपराध नहीं, बल्कि एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। इस पर घर और समाज में यदि खुलकर बात की जाए, तो माहवारी के दौरान स्वच्छता के महत्व को भी समझा जा सकता है। इसके लिए हमें एक माहौल बनाना होगा और पुरानी परंपरागत सोच को बदलना होगा। यह कहना है जिला महिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ दीपमाला का। डॉ दीपमाला बताती हैं कि माहवारी के दौरान स्वच्छता पर खुलकर बात करने से न केवल महिलायें स्वस्थ होंगी, बल्कि उनका बल मिलेगा आगे बढ़ने का। कभी नहीं रुकने का और डर को जड़ से खत्म कर देने का।
एसीएमओ परिवार कल्याण डॉ एपी सिंह ने बताया कि 28 मई को पूरी दुनिया में मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य है लड़कियों और महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता रखने के लिए जागरूक करना। तारीख 28 इसलिए चुनी गई, क्योंकि आमतौर पर महिलाओं के मासिक धर्म 28 दिनों के भीतर आते हैं। इस वर्ष यह दिवस “मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता में कार्रवाई और निवेश बढ़ाने” की थीम पर मनाया जा रहा है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ शालू महेश का कहना है कि पहले के जमाने में इस विषय पर कोई भी खुलकर बात नहीं करता था और न ही चाहता था कि इतना बेबाकी से इस विषय पर दूसरे उनसे खुलें। महिलाओं को अपने शरीर की एक प्राकृतिक क्रिया के बारे में समय से पहले बताया ही नहीं जाता था, तो उनके मानसिक रूप से तैयार होने और स्वच्छता बनाए रखने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उल्टा उस स्थिति में उनसे, यह मत करो, वह मत करो, मंदिर मत जाओ, अचार मत छुओ, एक जगह बैठो, ऐसा सब कहा जाता था, जो बहुत ही अजीब और बुरी लगती थी, लेकिन उन्हें झेलना पड़ता था। हालांकि आज फिर भी इन धारणाओं पर काफी हद तक लगाम लग चुकी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। ऐसे में शिक्षा ही एक मात्र युक्ति है, जो माहवारी से जुड़ी पुरानी धारणाओं और विचारों को बदल सकती है। शिक्षा से ही समझ और जागरूकता आती है। लड़कियों को कम से कम यह तो पता लगे कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, शर्मनाक नहीं। हम उन्हें डरा देते हैं और वे समझती हैं कि शायद उन्होंने ही कुछ गलत किया है। शिक्षा से ही अंधेरा दूर होगा द्य सूचना से ही जागरूकता आएगी।
स्वच्छता के अभाव से होने वाली परेशानियां :
डॉ सुवर्णा श्रीवास्तव बताती हैं कि मासिक धर्म में स्वच्छता नहीं होने के कारण देश की महिलाओं की जान भी जा रही है। हम सर्वाइकल कैंसर में पहले नंबर पर हैं। इसलिए मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में गंभीरता से सोचने की जरूरत है। मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता न रखने पर बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन होने की संभावना बनी रहती है। यह संक्रमण कभी-कभी यूट्रस तक भी पहुंच जाता है। स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी है। मासिक धर्म के समय सेनेटरी पैड्स का इस्तेमाल करें। इन्हें भी हर छह घंटे में बदलें। गीला रहने पर त्वचा में संक्रमण हो सकता है। इस्तेमाल किए गए पैड को सही तरीके से फेंकना भी बहुत जरूरी है, नहीं तो आसपास के वातावरण में भी बीमारियां फैल सकती हैं। प्रयोग किए गए पैड्स कागज में लपेटकर कूड़ेदान में डालें।
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