वृद्ध आश्रम में बुधवार को आयोजित किया गया साक्षरता शिविर
जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। जनपद न्यायाधीश संजय शंकर पाण्डेय के निर्देशानुसार बुधवार को वृद्ध आश्रम में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन प्रभारी सचिव/सिविल जज (सीडि) रवि शंकर गुप्ता की अध्यक्षता में किया गया। वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि जीवन को मुख्यतः तीन अवस्थाओं में बांटा गया है-बाल्यावस्था, युवावस्था तथा वृद्धावस्था। जिस प्रकार बाल्यावस्था के बाद युवावस्था आती है, ठीक उसी प्रकार युवावस्था के बाद वृद्धावस्था आती है। इसलिए हर कोई सदैव युवा रहने का स्वप्न देखता है। वृद्धावस्था में उसे समाज एवं परिवार की नजरों में बोझ, अनुपयोगी आदि समझे जाने से उसे मानसिक पीड़ा होती है। जो व्यक्ति कुछ समय पहले तक सबके लिए विशिष्ट था, महत्वपूर्ण था, अचानक ही उसे बोझ समझा जाने लगता है। जब उसके मान-सम्मान एवं भावनाओं का महत्व बहुत कम हो जाता है, और वह मानसिक रूप से स्वयं को अकेला पाता है, तो वह उसके जीवन का सबसे कठिन समय होता है। आज हममें से बहुत से लोग बुजुर्गों के महत्व से भली-भांति परिचित नही हैं। बड़े बुजुर्गों से परिवार में अनुशासन बना रहता है। अक्सर प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए बुजुर्गों के अनुभव बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं। वृद्धावस्था व्यक्ति के आराम करने की अवस्था होती है। वह जीवन भर दूसरों की जरूरतों को पूरा करने और अपने कर्तव्यों को निभाने में ही लगा रहता है।
यह भी पढ़ें : बिजली विभाग के SDO व JE निलंबित, दो ExEn को नोटिस
उन्होंने कहा कि सभी व्यक्तियों को यह मानसिक रूप से स्वीकार कर लेना चाहिए कि वृद्धावस्था एक न एक दिन सबके जीवन में आती है। वृद्धों के साथ सम्मानजनक व्यवहार न करना पूर्णतः अनैतिक है, इसीलिए हमें उनका महत्व समझते हुए उनका सम्मान करना चाहिए और उनकी सेवा करनी चाहिए। उनकी उपस्थिति तथा मार्गदर्शन परिवार और समाज दोनों के लिए कल्याणकारी है। यदि आज हम उनका सम्मान करेंगे, तभी हम अपनी आने वाली पीढ़ी से सम्मान पाने के अधिकारी होंगें। प्रभारी सचिव ने यह भी बताया कि वृद्धजनों को यदि संतान भरण पोषण से मना करे, तो भरण पोषण का दावा किया जा सकता है तथा घरेलू हिंसा से भी संरक्षण मिलेगा। जो वृद्ध समय रहते अपने उत्तराधिकारी या रिश्तेदार को उपहार स्वरूप या फिर उनका हक मानते हुए अपनी सम्पत्ति उन्हें अन्तरित कर देते हैं, तत्पश्चात उन्हें भरण-पोषण एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यकताओं की प्राप्ति नही होती है। ऐसे में अधिकरण में अपील कर वे अपनी सम्पत्ति वापस प्राप्त कर सकते हैं और स्थानान्तरण रद्द करवा सकते है। इस अवसर पर वृद्ध आश्रम के प्रभारी प्रबन्धक जितेन्द्र विक्रम सिंह, सेवाकर्ता ओंकार, शुभम, प्रेम शंकर, लिपिक मुकेश कुमार वर्मा, पीएलवी प्रभूनाथ व अन्य कर्मचारी गण उपस्थित रहे।
यह भी पढ़ें : 31 जनवरी तक प्रभावी रहेगी एकमुश्त समाधान योजना

