Wednesday, February 11, 2026
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Gonda News:बच्चो के शारीरिक और मानसिक विकास का सहज उपकरण है योग

बाल संस्कार शिविर में नंन्हे योगी नियमित रूप से कर रहे हैं योगाभ्यास

जानकी शरण द्विवेदी

गोण्डा। बच्चों के अंदर अच्छी आदतें डालना अभिभावकों की जिम्मेदारी है। बचपन से ही जब हम उनके अंदर सही दिनचर्या और खानपान सिखाते हैं तो आगे चलकर वहीं बच्चे स्वस्थ रहते हैं। अगर आप अपने बच्चों का सही मानसिक और शारीरिक विकास करना चाहते हैं, तो उनके जीवन में योग को भी जरूर शामिल करें। बचपन से ही योग का नियमित अभ्यास उनको आगे चलकर बहुत फायदा देगा। इसी उद्देश्य के साथ योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी के मार्गदर्शन में रामलीला मैदान स्थित सखी बाबा आश्रम के प्रांगण में योग शिक्षक आशीष गुप्ता द्वारा सायं कालीन नियमित योग कक्षाएं चलाई जा रही हैं, जिसमे योग शिक्षक द्वारा बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए आसन में शीर्षासन, ताड़ासन, वृक्षासन, सर्वांगासन, चक्रासन, भुजंगासन, नटराज आसन के साथ साथ विभिन्न प्रकार के आसनों का अभ्यास कराया जाता है। बच्चे बहुत ही उत्साह एवं लगन के साथ योगाभ्यास करते है।
योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने बताया कि कम उम्र से ही यदि बच्चे योगा का अभ्यास करना शुरू कर देते हैं तो उन्हें कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। इसके अलावा योग उनका मानसिक विकास भी बेहतर तरीके से करने में मदद करता है। कम उम्र में इंसान किसी भी चीज को जल्दी सिखता है, इसलिए सभी माता-पिता अपने बच्चों को योग के प्रति जागरूक करे। उन्होंने कहा कि सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे शरीरिक और मानसिक दोनों प्रकार से स्वस्थ हों। हालांकि बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए अभिभावक उनकी डाइट पर खास ध्यान देते हैं, लेकिन बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ इतना ही काफी नहीं है। बच्चे स्वस्थ रहें, इसके लिए जरूरी है कि वह ’फिजिकल एक्टिविटी’ पर भी ध्यान दें। ऐसे में आप उन्हें योग करवा सकते हैं, जिससे वह शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ भी रहेंगे और उनकी एक्स्ट्रा एक्टिविटी भी हो जाएगी। योग शिक्षक आशीष गुप्ता ने बताया कि योग के नियमित अभ्यास से तनाव और चिंता को दूर किया जा सकता है। पढ़ाई या अन्य किसी कारण से बच्चे भी तनाव या एंग्जाइटी डिसऑर्डर की चपेट में आ जाते हैं। मगर रोजाना योग करने से बच्चे इससे बचे रहते हैं। साथ ही इससे वे अस्थमा, दिल के रोग और ब्लड प्रैशर जैसी परेशानियों से भी दूर रहते हैं, जो आजकल छोटे बच्चों में भी देखने को मिल रही है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के कारण बच्चों का फिजिकल एक्टिविटी में इंटरेस्ट खत्म हो जाता रहा है। ऐसे में आप अपने बच्चों को योग के प्रति प्रेरित कर उन्हें तनाव मुक्त कर सकते है। योग शिक्षक आदर्श गुप्ता ने कहा कि आजकल बड़ों के साथ-साथ बच्चों में भी सांस संबंधी, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, आइबी सिंड्रोम और अस्थमा आदि की समस्या देखने को मिलती है। मगर रोजाना योग करने से बच्चे ऐसी गंभीर बीमारियों से बचे रहते हैं। उन्होंने कहा कि योग से बच्चे तनाव और चिंता से दूर रहते हैं। साथ ही इससे उनका कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है, जिससे वे स्कूल में अपना बेस्ट परफार्मेंस देते हैं। फिर बात चाहे पढ़ाई की हो या एक्स्ट्रा एक्टिविटी की। अगर बच्चे को कोई बीमारी है तो आप एक्सपर्ट से राय लेकर उन्हें योगासन करवा सकते हैं।

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