Wednesday, February 11, 2026
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Gonda News:प्रेम व भक्ति के तप से प्रभु लेते हैं अवतार-विपिन शास्त्री

भगवती दुर्गा मन्दिर में चल रहे रामकथा महोत्सव में भाव विभोर हुए श्रद्धालु

संवाददाता

गोण्डा। परमात्मा सर्व व्यापक माया रहित निरंजन निर्गुण और अजन्मा व्रह्म हैं लेकिन प्रेम व भक्ति के वशीभूत होकर वही व्रह्म जगत में अवतार लेकर भक्तों को सुख व दुष्टों का संहार करते हैं। बस स्टेशन स्थित भगवती दुर्गा मन्दिर में चल रहे संगीतमय रामकथा महोत्सव में अयोध्या के कथा व्यास विपिन शास्त्री ने व्यक्त किए। तुलसी कृति रामचरित मानस से भगवान राम के जन्म का प्रसंग में विपिन ने कहा कि भगवान ने राजा दशरथ व माताओं की तपस्या से रीझ कर समाज में धर्म की मर्यादा स्थापित करने एवं व्यक्ति में आचरण की शुद्धता चरित्र में सिद्धान्त पारिवारिक आदर्श स्थापित करने के लिए अवतार लिया था। गोस्वामी जी ने भगवान के जन्म के प्रसंग में मानस में कहा- ’बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार’। कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुए व्यास श्री शास्त्री ने कहा कि भगवान का जन्म चैत मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को अभिजीत मुहूर्त में हुआ। प्रभु के जन्म के अवसर पर जड़ व चेतन के जीव व प्रकृति सभी प्रसन्न होकर विभोर हो गए। गोस्वामी जी लिखते हैं-’जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भये अनुकूल’ और फिर भगवान जन्म पर गोस्वामी जी छन्द में अवतार का गुणगान कर कहते हैं-’भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी’ संगीतमयी कथा में जन्म के अवसर पर संगीतकारों की सुमधुर प्रस्तुति एवं भगवान के वाल्य-स्वरूप पर सजाई गई झांकी को देखकर श्रद्धालु दर्शक भाव विभोर हो गए। महिलाओं ने भगवान जन्म की खुशी में मंगलगान सोहर गीत के साथ नृत्य किया। भक्तों के ओर से न्योछावर में रुपये व वस्त्र भेंट किए। ठंडक के बावजूद कथा का उत्सव देर तक चलता रहा। कथा संयोजक शिव कुमार शास्त्री ने सभी श्रोताओं को कथा में सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। इस मौके पर रोशन लाल अरोड़ा, राजेश शुक्ल, पं. राजेन्द्र प्रसाद, लवकुश, जटाशंकर, शैलेन्द्र भारती, गायत्री देवी, सावित्री देवी व सुदेश आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।

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