जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। अमिताभ बच्चन का वह प्रचार जिसमें वह कहते हैं-‘तीन हफ़्तों से ज़्यादा खांसी आ रही है, तो टीबी की जांच अवश्य कराएं। टीबी बोले तो ट्यूबरक्लोसिस।’ आपने यह प्रचार कई बार सुना होगा। दिमाग में इस बीमारी की एक तस्वीर भी है। वही बीमारी, जिसमें खांस-खांसकर जान चली जाती है। टीबी एक ऐसी बीमारी है, जो बैक्टीरिया की वजह से होती है। आमतौर पर हमें लगता है कि यी बीमारी फेफड़ों में होती है, पर यह सही नहीं है। टीबी फेफड़ों के अलावा दूसरे अंगों में भी हो सकती है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मलिक के अनुसार, महिलाओं के प्रजनन अंग में भी टीबी की बीमारी हो सकती है। अगर समय से इसका इलाज न कराया जाय तो टीबी बांझपन का कारण बन सकती है। इस बारे में जिला महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सुवर्णा श्रीवास्तव का कहना है कि इस तरह के टीबी को पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस कहते हैं। इस तरह की टीबी महिलाओं के प्रजनन अंग जैसे गर्भाशय और उससे जुड़े फैलोपियन ट्यूब में भी हो सकती है। डॉ सुवर्णा के अनुसार, माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस, एक तरह के ऐसे जीवाणु होते हैं, जिनके कारण शरीर में टीबी होती है। यह जीवाणु शरीर के किसी हिस्से में घर कर जाए, तो यह प्रजनन अंग तक पहुंच सकते हैं। उनका कहना है कि शुरुआती दौर में इस तरह के टीबी का पकड़ में आना थोड़ा मुश्किल होता है। कई लोग इसे कैंसर भी समझ लेते हैं, पर यह कैंसर नहीं है। इसकी जानकारी तब होती है, जब गर्भधारण करने में समस्या होने पर टीबी की जांच करायी जाती है। शुरुआती दौर में इसके कुछ लक्षण जैसे थकान, हल्का बुखार, पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना, वजाइना से सफ़ेद पानी निकलना, पीरियड्स ठीक समय पर न होना होते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इसके बारे में जानने के लिए एक टेस्ट होता है, जिसे ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट कहते हैं। यह शरीर में किसी भी हिस्से में होने वाले टीबी के बारे में पता लगा लेता है। आपके पेट के निचले हिस्से का अल्ट्रासाउंड भी इस बीमारी का पता लगा सकता है। इसलिए ज़रूरी है कि बताए गए लक्षण दिखायी दें तो डॉक्टर से अवश्य मिलना चाहिए। डॉ सुवर्णा के अनुसार, पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस का इलाज इस पर निर्भर करता है कि कंडीशन कितनी सीरियस है, दवाइयों से लेकर सर्जरी तक की जा सकती हैद्यपेल्विक ट्यूबरक्लोसिस को प्रजनन अंग तक आने से रोकने के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि शरीर के किसी और हिस्से में टीबी तो नहीं है; वरना उसके फैलने की संभावना अधिक हो जाती है। आंकड़े बताते हैं कि देश में लगभग 17.4 फीसद महिलाओं के प्रजनन अंगों में टीबी हो जाती है। अर्थात महिलाओं के फैलोपियन ट्यूब में लगभग 90 से 100 प्रतिशत, गर्भाशय में 50 से 60 प्रतिशत और ओवरी में 20 से 30 प्रतिशत तक टीबी हो सकती है।
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