संदीप पाण्डेय
गोण्डा। हिन्दू धर्म मे कुओ का खास महत्व है, जो आज भी शुभ कार्यो में समय समय पर पूजे जाते है। विवाह आदि मौकों पर इनकी परिक्रमा भी होती है और इनके किनारों पर स्थित घास की पूजा होती है। हमारे परम्पराओ के प्रतीक कुओं का अस्तित्व अब खतरे में है और यह धीरे धीरे खत्म हो रहे है। नगर, कस्बा व बाजार सहित ग्रामीण क्षेत्रों में प्राचीन जल श्रोत कुएं लगभग समाप्ति की ओर जा रहे हैं। जहां पेयजल सुविधा के लिए हर जगह कुआं होता था। वहीं आज कुओं को मिट्टी, कूड़ा आदि डालकर बंद किया जा रहा है। अब लोग जल संस्थान के सहारे हो चुके हैं या फिर हैंडपंप का पानी पी रहे हैं और कुओ को बेकार मानकर खत्म कर रहे है। पहले लोग कस्बा व ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की सुविधा के लिए कुआं की स्थापना कराते थे। प्रत्येक मुहल्लों में लगभग एक कुआं बना रहता था। जिससे कि पुरुषों की अनुपस्थित में महिलाएं भी पानी भर सकें। इनका उपयोग लोग पेयजल के लिए करते थे साथ ही साग सब्जी आदि की सिंचाई इनसे होती थी तथा कही आग लगने पर यह बुझाने में सहयोग करते थे। रख रखाव के अभाव में अधिकांश कुएं गिर चुके हैं या लोगों ने उसमें कूड़ा डालकर बंद कर दिया है। जिससे कुओं का अस्तित्व समाप्त हो चला है। भले ही हिन्दू धर्म मे कुंआ पूजन की परंपरा आज भी कायम है लेकिन लोग इनको सुरक्षित रखने पर कोई ध्यान नही दे रहे। हकीकत यह है कि कभी शासन प्रशासन द्वारा भी कुओं का जीर्णोद्वार का कार्य ठीक से नहीं कराया जा रहा है, कागजो में भले ही कुछ हो रहा हो।
कभी प्यास बुझाने के लिए बने कुओ के अस्तित्व पर ही खतरा अब मंडराने लगा है। विवाह के विधान बिना कुएं के पूरे नहीं होते लेकिन अब खोजने से भी ग्रामो में शुद्ध व स्वक्ष कुएं नहीं मिल रहे। लग्न आते हीं कुएं की रौनक बढ़ जाती थी जो अब बेकार पड़े है। मान्यता है कि बिना कुंए के विवाह का विधान पूरा नहीं होता लेकिन अब यह परंपरा कुएं वाले स्थान पर लोग जाकर पूर्ण कर रहे और मौके से कुएं गायब है। पुराने जमाने में जब कुओं का निर्माण कराया जाता था तब इसे पेय जल स्त्रोत का बेहतर साधन माना जाता था। धीरे- धीरे आधुनिक युग में कुआं का महत्व कम होने लगा और इसकी जगह काफी संख्या में हैंड पम्प, बोरवेल आदि जल स्रोतों को लोग अपनाने लगे। नतीजतन धीरे धीरे कुआं का अस्तित्व विलीन होने लगा। इटियाथोक क्षेत्र के पंडित लवकुश शुक्ला के अनुसार हमारे हिन्दू धर्म में हर रस्म के पीछे कोई न कोई धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्व छुपा होता है। माना जाता है कि जल ही जीवन है शायद इसलिए किसी भी शुभ कार्य में कुआं पूजा को बहुत शुभ माना जाता है। शादी ब्याह हो या घर में बच्चे का जन्म इन सब अवसरों पर कुआं पूजन शुभ माना जाता है। उन्होंने कहा कि कुओ का खत्म होना हमारे समाज के लिए दुखद है।
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